पंचांग · गोचर · बुध
2008 में बुध का गोचर
2008 में बुध 13 बार राशि बदलता है: 4 जनवरी को मकर, 10 मार्च को कुम्भ, 30 मार्च को मीन, 15 अप्रैल को मेष …। वक्री: 29 जनवरी, 26 मई, 24 सितंबर से।
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
2008 में बुध किन राशियों में है
- धनु17 दिसंबर, रात 3:01 2007 → 4 जनवरी, शाम 7:50 2008· 19 दिन
- मकर4 जनवरी, शाम 7:50 2008 → 10 मार्च, शाम 4:56 2008· लगभग 2 महीने
- कुम्भ10 मार्च, शाम 4:56 2008 → 30 मार्च, शाम 4:00 2008· 20 दिन
- मीन30 मार्च, शाम 4:00 2008 → 15 अप्रैल, सुबह 8:14 2008· 16 दिन
- मेष15 अप्रैल, सुबह 8:14 2008 → 29 अप्रैल, रात 8:05 2008· 14 दिन
- वृषभ29 अप्रैल, रात 8:05 2008 → 6 जुलाई, रात 9:23 2008· लगभग 2 महीने
- मिथुन6 जुलाई, रात 9:23 2008 → 23 जुलाई, रात 11:16 2008· 17 दिन
- कर्क23 जुलाई, रात 11:16 2008 → 7 अगस्त, दोपहर 1:45 2008· 15 दिन
- सिंह7 अगस्त, दोपहर 1:45 2008 → 25 अगस्त, सुबह 5:57 2008· 18 दिन
- कन्या25 अगस्त, सुबह 5:57 2008 → 1 नवंबर, सुबह 5:11 2008· लगभग 2 महीने
- तुला1 नवंबर, सुबह 5:11 2008 → 19 नवंबर, रात 8:08 2008· 19 दिन
- वृश्चिक19 नवंबर, रात 8:08 2008 → 8 दिसंबर, रात 9:52 2008· 19 दिन
- धनु8 दिसंबर, रात 9:52 2008 → 28 दिसंबर, सुबह 8:15 2008· 19 दिन
- मकर28 दिसंबर, सुबह 8:15 2008 → 26 जनवरी, रात 11:32 2009· 30 दिन
तारीखवार
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
जनवरी 2008
4 जनवरीशाम 7:50
बुध का मकर में प्रवेश
10 जनवरीदोपहर 3:49
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीसुबह 4:30
बुध मकर 29°55′ पर वक्री
31 जनवरीरात 11:43
बुध अस्त (12 फ़रवरी तक)†
फ़रवरी 2008
12 फ़रवरीशाम 7:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 फ़रवरीसुबह 10:57
बुध मकर 14°21′ पर मार्गी
मार्च 2008
10 मार्चशाम 4:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश
30 मार्चशाम 4:00
बुध का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2008
2 अप्रैलसुबह 6:47
बुध अस्त (29 अप्रैल तक)†
15 अप्रैलसुबह 8:14
बुध का मेष में प्रवेश
29 अप्रैलसुबह 9:08
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अप्रैलरात 8:05
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2008
26 मईरात 11:46
बुध वृषभ 27°34′ पर वक्री
30 मईसुबह 11:15
बुध अस्त (16 जून तक)†
जून 2008
16 जूनदोपहर 12:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
19 जूनरात 10:31
बुध वृषभ 19°01′ पर मार्गी
जुलाई 2008
6 जुलाईरात 9:23
बुध का मिथुन में प्रवेश
17 जुलाईदोपहर 12:32
बुध अस्त (13 अगस्त तक)†
23 जुलाईरात 11:16
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2008
7 अगस्तदोपहर 1:45
बुध का सिंह में प्रवेश
13 अगस्तसुबह 8:50
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 अगस्तसुबह 5:57
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2008
24 सितंबरदोपहर 3:16
बुध कन्या 28°52′ पर वक्री
अक्टूबर 2008
1 अक्टूबरसुबह 7:31
बुध अस्त (13 अक्टूबर तक)†
13 अक्टूबरदोपहर 12:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अक्टूबरसुबह 4:06
बुध कन्या 13°35′ पर मार्गी
नवंबर 2008
1 नवंबरसुबह 5:11
बुध का तुला में प्रवेश
2 नवंबरशाम 4:25
बुध अस्त (21 दिसंबर तक)†
19 नवंबररात 8:08
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2008
8 दिसंबररात 9:52
बुध का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरदोपहर 12:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 दिसंबरसुबह 8:15
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2008: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
