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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2017 में बुध का गोचर

2017 में बुध 13 बार राशि बदलता है: 3 फ़रवरी को मकर, 22 फ़रवरी को कुम्भ, 10 मार्च को मीन, 27 मार्च को मेष …। वक्री: 10 अप्रैल, 13 अगस्त, 3 दिसंबर से।

सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।

2017 में बुध किन राशियों में है

  1. धनु28 नवंबर, शाम 6:40 2016 → 3 फ़रवरी, सुबह 9:46 2017· लगभग 2 महीने
  2. मकर3 फ़रवरी, सुबह 9:46 2017 → 22 फ़रवरी, दोपहर 3:14 2017· 19 दिन
  3. कुम्भ22 फ़रवरी, दोपहर 3:14 2017 → 10 मार्च, रात 11:05 2017· 16 दिन
  4. मीन10 मार्च, रात 11:05 2017 → 27 मार्च, सुबह 4:03 2017· 16 दिन
  5. मेष27 मार्च, सुबह 4:03 2017 → 3 जून, शाम 4:22 2017· लगभग 2 महीने
  6. वृषभ3 जून, शाम 4:22 2017 → 18 जून, शाम 7:21 2017· 15 दिन
  7. मिथुन18 जून, शाम 7:21 2017 → 2 जुलाई, रात 11:33 2017· 14 दिन
  8. कर्क2 जुलाई, रात 11:33 2017 → 21 जुलाई, सुबह 6:48 2017· 18 दिन
  9. सिंह21 जुलाई, सुबह 6:48 2017 → 26 सितंबर, रात 8:58 2017· लगभग 2 महीने
  10. कन्या26 सितंबर, रात 8:58 2017 → 13 अक्टूबर, रात 8:21 2017· 17 दिन
  11. तुला13 अक्टूबर, रात 8:21 2017 → 1 नवंबर, रात 9:13 2017· 19 दिन
  12. वृश्चिक1 नवंबर, रात 9:13 2017 → 24 नवंबर, सुबह 10:23 2017· 23 दिन
  13. धनु24 नवंबर, सुबह 10:23 2017 → 11 दिसंबर, रात 12:48 2017· 17 दिन
  14. वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)11 दिसंबर, रात 12:48 2017 → 6 जनवरी, शाम 4:18 2018· 27 दिन

तारीखवार

सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।

जनवरी 2017

  • 3 जनवरीसुबह 7:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 जनवरीसुबह 11:43

    बुध धनु 4°46′ पर मार्गी

फ़रवरी 2017

  • 3 फ़रवरीसुबह 9:46

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीसुबह 11:25

    बुध अस्त (21 मार्च तक)†

  • 22 फ़रवरीदोपहर 3:14

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2017

  • 10 मार्चरात 11:05

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 21 मार्चरात 11:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 मार्चसुबह 4:03

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 2017

  • 10 अप्रैलरात 1:13

    बुध मेष 10°45′ पर वक्री

  • 12 अप्रैलसुबह 9:00

    बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†

  • 27 अप्रैलशाम 7:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2017

  • 3 मईशाम 6:33

    बुध मेष 0°10′ पर मार्गी

जून 2017

  • 3 जूनशाम 4:22

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 9 जूनदोपहर 1:22

    बुध अस्त (4 जुलाई तक)†

  • 18 जूनशाम 7:21

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2017

  • 2 जुलाईरात 11:33

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 4 जुलाईरात 2:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 जुलाईसुबह 6:48

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2017

  • 13 अगस्तरात 2:59

    बुध सिंह 17°32′ पर वक्री

  • 20 अगस्तसुबह 5:41

    बुध अस्त (3 सितंबर तक)†

सितंबर 2017

  • 3 सितंबरसुबह 5:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 5 सितंबरदोपहर 1:29

    बुध सिंह 4°19′ पर मार्गी

  • 21 सितंबरदोपहर 1:50

    बुध अस्त (31 अक्टूबर तक)†

  • 26 सितंबररात 8:58

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2017

  • 13 अक्टूबररात 8:21

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरशाम 6:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

नवंबर 2017

  • 1 नवंबररात 9:13

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 24 नवंबरसुबह 10:23

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2017

  • 3 दिसंबरसुबह 9:33

    बुध धनु 5°12′ पर वक्री

  • 7 दिसंबरशाम 4:03

    बुध अस्त (18 दिसंबर तक)†

  • 11 दिसंबररात 12:48

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 18 दिसंबरदोपहर 2:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 दिसंबररात 3:51

    बुध वृश्चिक 18°54′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2017: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और