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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2018 में बुध का गोचर

2018 में बुध 12 बार राशि बदलता है: 6 जनवरी को धनु, 28 जनवरी को मकर, 15 फ़रवरी को कुम्भ, 3 मार्च को मीन …। वक्री: 23 मार्च, 26 जुलाई, 17 नवंबर से।

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

2018 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक(वक्री गति से प्रवेश)11 दिसंबर, सुबह 4:33 2017 → 6 जनवरी, रात 8:03 2018· 27 दिन
  2. धनु6 जनवरी, रात 8:03 2018 → 28 जनवरी, रात 1:17 2018· 21 दिन
  3. मकर28 जनवरी, रात 1:17 2018 → 15 फ़रवरी, रात 3:38 2018· 18 दिन
  4. कुम्भ15 फ़रवरी, रात 3:38 2018 → 3 मार्च, सुबह 7:08 2018· 16 दिन
  5. मीन3 मार्च, सुबह 7:08 2018 → 9 मई, शाम 5:46 2018· लगभग 2 महीने
  6. मेष9 मई, शाम 5:46 2018 → 27 मई, सुबह 8:38 2018· 18 दिन
  7. वृषभ27 मई, सुबह 8:38 2018 → 10 जून, सुबह 7:47 2018· 14 दिन
  8. मिथुन10 जून, सुबह 7:47 2018 → 25 जून, शाम 6:19 2018· 15 दिन
  9. कर्क25 जून, शाम 6:19 2018 → 2 सितंबर, रात 9:21 2018· लगभग 2 महीने
  10. सिंह2 सितंबर, रात 9:21 2018 → 19 सितंबर, सुबह 4:29 2018· 16 दिन
  11. कन्या19 सितंबर, सुबह 4:29 2018 → 6 अक्टूबर, दोपहर 12:57 2018· 17 दिन
  12. तुला6 अक्टूबर, दोपहर 12:57 2018 → 26 अक्टूबर, रात 8:58 2018· 20 दिन
  13. वृश्चिक26 अक्टूबर, रात 8:58 2018 → 1 जनवरी, सुबह 10:05 2019· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय काठमांडू के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

जनवरी 2018

  • 6 जनवरीरात 8:03

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 27 जनवरीदोपहर 12:07

    बुध अस्त (6 मार्च तक)†

  • 28 जनवरीरात 1:17

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2018

  • 15 फ़रवरीरात 3:38

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2018

  • 3 मार्चसुबह 7:08

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 6 मार्चरात 2:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 मार्चसुबह 6:03

    बुध मीन 22°48′ पर वक्री

  • 25 मार्चदोपहर 12:40

    बुध अस्त (8 अप्रैल तक)†

अप्रैल 2018

  • 8 अप्रैलरात 9:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 अप्रैलदोपहर 3:06

    बुध मीन 10°40′ पर मार्गी

मई 2018

  • 9 मईशाम 5:46

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 25 मईरात 1:30

    बुध अस्त (18 जून तक)†

  • 27 मईसुबह 8:38

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2018

  • 10 जूनसुबह 7:47

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 18 जूनसुबह 11:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जूनशाम 6:19

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2018

  • 26 जुलाईसुबह 10:46

    बुध कर्क 29°20′ पर वक्री

अगस्त 2018

  • 2 अगस्तरात 3:38

    बुध अस्त (17 अगस्त तक)†

  • 17 अगस्तरात 12:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 19 अगस्तसुबह 10:10

    बुध कर्क 17°25′ पर मार्गी

सितंबर 2018

  • 2 सितंबररात 9:21

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 5 सितंबरशाम 4:31

    बुध अस्त (11 अक्टूबर तक)†

  • 19 सितंबरसुबह 4:29

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2018

  • 6 अक्टूबरदोपहर 12:57

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 11 अक्टूबरसुबह 10:54

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 अक्टूबररात 8:58

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2018

  • 17 नवंबरसुबह 7:17

    बुध वृश्चिक 19°22′ पर वक्री

  • 22 नवंबररात 3:35

    बुध अस्त (3 दिसंबर तक)†

दिसंबर 2018

  • 3 दिसंबरसुबह 4:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 दिसंबररात 3:07

    बुध वृश्चिक 3°09′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2018: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और