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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

2049 में बुध का गोचर

2049 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 10 जनवरी को धनु (वक्री, पीछे की ओर), 8 फ़रवरी को मकर, 1 मार्च को कुम्भ, 18 मार्च को मीन …। वक्री: 3 जनवरी, 27 अप्रैल, 29 अगस्त, 18 दिसंबर से।

सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

2049 में बुध किन राशियों में है

  1. मकर26 दिसंबर, रात 3:02 2048 → 10 जनवरी, दोपहर 12:07 2049· 15 दिन
  2. धनु(वक्री गति से प्रवेश)10 जनवरी, दोपहर 12:07 2049 → 8 फ़रवरी, सुबह 5:25 2049· 29 दिन
  3. मकर8 फ़रवरी, सुबह 5:25 2049 → 1 मार्च, दोपहर 1:49 2049· 21 दिन
  4. कुम्भ1 मार्च, दोपहर 1:49 2049 → 18 मार्च, दोपहर 2:58 2049· 17 दिन
  5. मीन18 मार्च, दोपहर 2:58 2049 → 2 अप्रैल, दोपहर 2:53 2049· 15 दिन
  6. मेष2 अप्रैल, दोपहर 2:53 2049 → 8 जून, दोपहर 3:36 2049· लगभग 2 महीने
  7. वृषभ8 जून, दोपहर 3:36 2049 → 26 जून, शाम 6:19 2049· 18 दिन
  8. मिथुन26 जून, शाम 6:19 2049 → 10 जुलाई, शाम 6:44 2049· 14 दिन
  9. कर्क10 जुलाई, शाम 6:44 2049 → 26 जुलाई, रात 8:59 2049· 16 दिन
  10. सिंह26 जुलाई, रात 8:59 2049 → 20 अगस्त, रात 8:02 2049· 25 दिन
  11. कन्या20 अगस्त, रात 8:02 2049 → 5 सितंबर, दोपहर 2:15 2049· 16 दिन
  12. सिंह(वक्री गति से प्रवेश)5 सितंबर, दोपहर 2:15 2049 → 3 अक्टूबर, सुबह 11:53 2049· 28 दिन
  13. कन्या3 अक्टूबर, सुबह 11:53 2049 → 21 अक्टूबर, रात 1:55 2049· 18 दिन
  14. तुला21 अक्टूबर, रात 1:55 2049 → 8 नवंबर, दोपहर 1:26 2049· 18 दिन
  15. वृश्चिक8 नवंबर, दोपहर 1:26 2049 → 28 नवंबर, दोपहर 2:50 2049· 20 दिन
  16. धनु28 नवंबर, दोपहर 2:50 2049 → 3 फ़रवरी, सुबह 5:39 2050· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय जनकपुर के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

जनवरी 2049

  • 3 जनवरीसुबह 4:59

    बुध मकर 4°59′ पर वक्री

  • 6 जनवरीदोपहर 1:26

    बुध अस्त (17 जनवरी तक)†

  • 10 जनवरीदोपहर 12:07

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 जनवरीशाम 5:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जनवरीदोपहर 12:04

    बुध धनु 18°49′ पर मार्गी

फ़रवरी 2049

  • 8 फ़रवरीसुबह 5:25

    बुध का मकर में प्रवेश

मार्च 2049

  • 1 मार्चदोपहर 1:49

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 मार्चशाम 4:48

    बुध अस्त (5 अप्रैल तक)†

  • 18 मार्चदोपहर 2:58

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2049

  • 2 अप्रैलदोपहर 2:53

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 5 अप्रैलसुबह 8:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अप्रैलरात 12:04

    बुध मेष 27°07′ पर वक्री

  • 29 अप्रैलदोपहर 12:08

    बुध अस्त (15 मई तक)†

मई 2049

  • 15 मईशाम 7:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 मईशाम 7:42

    बुध मेष 17°43′ पर मार्गी

जून 2049

  • 8 जूनदोपहर 3:36

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 23 जूनशाम 4:50

    बुध अस्त (18 जुलाई तक)†

  • 26 जूनशाम 6:19

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2049

  • 10 जुलाईशाम 6:44

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईशाम 5:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जुलाईरात 8:59

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2049

  • 20 अगस्तरात 8:02

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 29 अगस्तरात 1:05

    बुध कन्या 2°52′ पर वक्री

सितंबर 2049

  • 5 सितंबरसुबह 4:30

    बुध अस्त (18 सितंबर तक)†

  • 5 सितंबरदोपहर 2:15

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 18 सितंबरसुबह 10:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 सितंबरशाम 7:54

    बुध सिंह 18°44′ पर मार्गी

अक्टूबर 2049

  • 3 अक्टूबरसुबह 11:53

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 6 अक्टूबरदोपहर 2:54

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 21 अक्टूबररात 1:55

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 2049

  • 8 नवंबरदोपहर 1:26

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरशाम 6:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 नवंबरदोपहर 2:50

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2049

  • 18 दिसंबररात 2:43

    बुध धनु 19°04′ पर वक्री

  • 21 दिसंबररात 10:13

    बुध अस्त (1 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2049: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और