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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · मंगल

2006 में मंगल का गोचर

2006 में मंगल 7 बार राशि बदलता है: 5 फ़रवरी को वृषभ, 3 अप्रैल को मिथुन, 24 मई को कर्क, 12 जुलाई को सिंह …।

सभी समय अटलांटा के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।

2006 में मंगल किन राशियों में है

  1. मेष17 जुलाई, रात 11:36 2005 → 5 फ़रवरी, रात 12:15 2006· लगभग 7 महीने
  2. वृषभ5 फ़रवरी, रात 12:15 2006 → 3 अप्रैल, सुबह 7:00 2006· 57 दिन
  3. मिथुन3 अप्रैल, सुबह 7:00 2006 → 24 मई, दोपहर 12:48 2006· 51 दिन
  4. कर्क24 मई, दोपहर 12:48 2006 → 12 जुलाई, रात 8:22 2006· 49 दिन
  5. सिंह12 जुलाई, रात 8:22 2006 → 29 अगस्त, दोपहर 2:11 2006· 48 दिन
  6. कन्या29 अगस्त, दोपहर 2:11 2006 → 14 अक्टूबर, दोपहर 12:09 2006· 46 दिन
  7. तुला14 अक्टूबर, दोपहर 12:09 2006 → 27 नवंबर, सुबह 9:05 2006· 44 दिन
  8. वृश्चिक27 नवंबर, सुबह 9:05 2006 → 8 जनवरी, सुबह 9:30 2007· 42 दिन

तारीखवार

सभी समय अटलांटा के स्थानीय समय (America/New York, EST/EDT) में।

फ़रवरी 2006

  • 5 फ़रवरीरात 12:15

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

अप्रैल 2006

  • 3 अप्रैलसुबह 7:00

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

मई 2006

  • 24 मईदोपहर 12:48

    मंगल का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2006

  • 12 जुलाईरात 8:22

    मंगल का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2006

  • 29 अगस्तदोपहर 2:11

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 31 अगस्तशाम 4:08

    मंगल अस्त (16 दिसंबर तक)†

अक्टूबर 2006

  • 14 अक्टूबरदोपहर 12:09

    मंगल का तुला में प्रवेश

नवंबर 2006

  • 27 नवंबरसुबह 9:05

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2006

  • 16 दिसंबररात 12:11

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ मंगल को सूर्य से 17° के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: मंगल (शब्दकोश) · गोचर 2006: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और