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पंचांग · गोचर · मंगल

2020 में मंगल का गोचर

2020 में मंगल 7 बार राशि बदलता है: 7 फ़रवरी को धनु, 22 मार्च को मकर, 4 मई को कुम्भ, 18 जून को मीन …। वक्री: 9 सितंबर से।

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।

2020 में मंगल किन राशियों में है

  1. वृश्चिक25 दिसंबर, सुबह 8:00 2019 → 7 फ़रवरी, दोपहर 2:22 2020· 44 दिन
  2. धनु7 फ़रवरी, दोपहर 2:22 2020 → 22 मार्च, रात 2:11 2020· 43 दिन
  3. मकर22 मार्च, रात 2:11 2020 → 4 मई, सुबह 8:12 2020· 43 दिन
  4. कुम्भ4 मई, सुबह 8:12 2020 → 18 जून, सुबह 7:46 2020· 45 दिन
  5. मीन18 जून, सुबह 7:46 2020 → 16 अगस्त, सुबह 6:00 2020· 59 दिन
  6. मेष16 अगस्त, सुबह 6:00 2020 → 3 अक्टूबर, रात 9:33 2020· 49 दिन
  7. मीन(वक्री गति से प्रवेश)3 अक्टूबर, रात 9:33 2020 → 23 दिसंबर, रात 8:51 2020· लगभग 3 महीने
  8. मेष23 दिसंबर, रात 8:51 2020 → 21 फ़रवरी, दोपहर 3:07 2021· लगभग 2 महीने

तारीखवार

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।

फ़रवरी 2020

  • 7 फ़रवरीदोपहर 2:22

    मंगल का धनु में प्रवेश

मार्च 2020

  • 22 मार्चरात 2:11

    मंगल का मकर में प्रवेश

मई 2020

  • 4 मईसुबह 8:12

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

जून 2020

  • 18 जूनसुबह 7:46

    मंगल का मीन में प्रवेश

अगस्त 2020

  • 16 अगस्तसुबह 6:00

    मंगल का मेष में प्रवेश

सितंबर 2020

  • 9 सितंबरदोपहर 3:18

    मंगल मेष 4°00′ पर वक्री

अक्टूबर 2020

  • 3 अक्टूबररात 9:33

    मंगल का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 2020

  • 13 नवंबरशाम 4:39

    मंगल मीन 21°05′ पर मार्गी

दिसंबर 2020

  • 23 दिसंबररात 8:51

    मंगल का मेष में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ मंगल को सूर्य से 17° के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: मंगल (शब्दकोश) · गोचर 2020: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और