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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · शुक्र

2037 में शुक्र का गोचर

2037 में शुक्र 13 बार राशि बदलता है: 3 जनवरी को धनु, 27 जनवरी को मकर, 20 फ़रवरी को कुम्भ, 16 मार्च को मीन …। वक्री: 14 दिसंबर से।

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

2037 में शुक्र किन राशियों में है

  1. वृश्चिक10 दिसंबर, सुबह 8:55 2036 → 3 जनवरी, सुबह 8:14 2037· 24 दिन
  2. धनु3 जनवरी, सुबह 8:14 2037 → 27 जनवरी, सुबह 6:21 2037· 24 दिन
  3. मकर27 जनवरी, सुबह 6:21 2037 → 20 फ़रवरी, सुबह 5:02 2037· 24 दिन
  4. कुम्भ20 फ़रवरी, सुबह 5:02 2037 → 16 मार्च, सुबह 5:31 2037· 24 दिन
  5. मीन16 मार्च, सुबह 5:31 2037 → 9 अप्रैल, सुबह 8:53 2037· 24 दिन
  6. मेष9 अप्रैल, सुबह 8:53 2037 → 3 मई, दोपहर 3:51 2037· 24 दिन
  7. वृषभ3 मई, दोपहर 3:51 2037 → 28 मई, रात 2:39 2037· 24 दिन
  8. मिथुन28 मई, रात 2:39 2037 → 21 जून, शाम 5:33 2037· 25 दिन
  9. कर्क21 जून, शाम 5:33 2037 → 16 जुलाई, दोपहर 1:40 2037· 25 दिन
  10. सिंह16 जुलाई, दोपहर 1:40 2037 → 10 अगस्त, शाम 5:32 2037· 25 दिन
  11. कन्या10 अगस्त, शाम 5:32 2037 → 5 सितंबर, सुबह 9:53 2037· 26 दिन
  12. तुला5 सितंबर, सुबह 9:53 2037 → 2 अक्टूबर, रात 12:48 2037· 27 दिन
  13. वृश्चिक2 अक्टूबर, रात 12:48 2037 → 30 अक्टूबर, रात 11:27 2037· 29 दिन
  14. धनु30 अक्टूबर, रात 11:27 2037 → 28 फ़रवरी, शाम 5:04 2038· लगभग 4 महीने

तारीखवार

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

जनवरी 2037

  • 3 जनवरीसुबह 8:14

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 27 जनवरीसुबह 6:21

    शुक्र का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2037

  • 8 फ़रवरीरात 10:56

    शुक्र अस्त (29 अप्रैल तक)†

  • 20 फ़रवरीसुबह 5:02

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2037

  • 16 मार्चसुबह 5:31

    शुक्र का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2037

  • 9 अप्रैलसुबह 8:53

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 29 अप्रैलदोपहर 2:29

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2037

  • 3 मईदोपहर 3:51

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 28 मईरात 2:39

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2037

  • 21 जूनशाम 5:33

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2037

  • 16 जुलाईदोपहर 1:40

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2037

  • 10 अगस्तशाम 5:32

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2037

  • 5 सितंबरसुबह 9:53

    शुक्र का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2037

  • 2 अक्टूबररात 12:48

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 अक्टूबररात 11:27

    शुक्र का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2037

  • 14 दिसंबरशाम 6:30

    शुक्र धनु 27°08′ पर वक्री

  • 30 दिसंबरसुबह 8:16

    शुक्र अस्त (9 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ शुक्र को सूर्य से 10° (वक्री में 8°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: शुक्र (शब्दकोश) · गोचर 2037: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और