पंचांग · गोचर · सूर्य
1997 में सूर्य का गोचर
1997 में सूर्य 12 बार राशि बदलता है: 13 जनवरी को मकर, 12 फ़रवरी को कुम्भ, 14 मार्च को मीन, 13 अप्रैल को मेष …।
सभी समय वैंकूवर के स्थानीय समय (America/Vancouver, PST/PDT) में।
1997 में सूर्य किन राशियों में है
- धनु15 दिसंबर, सुबह 4:10 1996 → 13 जनवरी, दोपहर 2:51 1997· 29 दिन
- मकर13 जनवरी, दोपहर 2:51 1997 → 12 फ़रवरी, रात 3:48 1997· 30 दिन
- कुम्भ12 फ़रवरी, रात 3:48 1997 → 14 मार्च, रात 12:42 1997· 30 दिन
- मीन14 मार्च, रात 12:42 1997 → 13 अप्रैल, सुबह 10:15 1997· 30 दिन
- मेष13 अप्रैल, सुबह 10:15 1997 → 14 मई, सुबह 7:11 1997· 31 दिन
- वृषभ14 मई, सुबह 7:11 1997 → 14 जून, दोपहर 1:50 1997· 31 दिन
- मिथुन14 जून, दोपहर 1:50 1997 → 16 जुलाई, रात 12:45 1997· 31 दिन
- कर्क16 जुलाई, रात 12:45 1997 → 16 अगस्त, सुबह 9:09 1997· 31 दिन
- सिंह16 अगस्त, सुबह 9:09 1997 → 16 सितंबर, सुबह 9:05 1997· 31 दिन
- कन्या16 सितंबर, सुबह 9:05 1997 → 16 अक्टूबर, रात 9:03 1997· 30 दिन
- तुला16 अक्टूबर, रात 9:03 1997 → 15 नवंबर, शाम 7:51 1997· 30 दिन
- वृश्चिक15 नवंबर, शाम 7:51 1997 → 15 दिसंबर, सुबह 10:29 1997· 30 दिन
- धनु15 दिसंबर, सुबह 10:29 1997 → 13 जनवरी, रात 9:12 1998· 29 दिन
तारीखवार
सभी समय वैंकूवर के स्थानीय समय (America/Vancouver, PST/PDT) में।
जनवरी 1997
13 जनवरीदोपहर 2:51
सूर्य का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 1997
12 फ़रवरीरात 3:48
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 1997
14 मार्चरात 12:42
सूर्य का मीन में प्रवेश
अप्रैल 1997
13 अप्रैलसुबह 10:15
सूर्य का मेष में प्रवेश
मई 1997
14 मईसुबह 7:11
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
जून 1997
14 जूनदोपहर 1:50
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 1997
16 जुलाईरात 12:45
सूर्य का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1997
16 अगस्तसुबह 9:09
सूर्य का सिंह में प्रवेश
सितंबर 1997
16 सितंबरसुबह 9:05
सूर्य का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 1997
16 अक्टूबररात 9:03
सूर्य का तुला में प्रवेश
नवंबर 1997
15 नवंबरशाम 7:51
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1997
15 दिसंबरसुबह 10:29
सूर्य का धनु में प्रवेश
यह भी देखें: सूर्य (शब्दकोश) · गोचर 1997: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
