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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · सूर्य

2026 में सूर्य का गोचर

2026 में सूर्य 12 बार राशि बदलता है: 14 जनवरी को मकर, 12 फ़रवरी को कुम्भ, 14 मार्च को मीन, 13 अप्रैल को मेष …।

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।

2026 में सूर्य किन राशियों में है

  1. धनु15 दिसंबर, दोपहर 2:42 2025 → 14 जनवरी, रात 1:29 2026· 29 दिन
  2. मकर14 जनवरी, रात 1:29 2026 → 12 फ़रवरी, दोपहर 2:30 2026· 30 दिन
  3. कुम्भ12 फ़रवरी, दोपहर 2:30 2026 → 14 मार्च, दोपहर 12:24 2026· 30 दिन
  4. मीन14 मार्च, दोपहर 12:24 2026 → 13 अप्रैल, रात 8:54 2026· 30 दिन
  5. मेष13 अप्रैल, रात 8:54 2026 → 14 मई, शाम 5:43 2026· 31 दिन
  6. वृषभ14 मई, शाम 5:43 2026 → 15 जून, रात 12:13 2026· 31 दिन
  7. मिथुन15 जून, रात 12:13 2026 → 16 जुलाई, सुबह 10:59 2026· 31 दिन
  8. कर्क16 जुलाई, सुबह 10:59 2026 → 16 अगस्त, शाम 7:18 2026· 31 दिन
  9. सिंह16 अगस्त, शाम 7:18 2026 → 16 सितंबर, शाम 7:13 2026· 31 दिन
  10. कन्या16 सितंबर, शाम 7:13 2026 → 17 अक्टूबर, सुबह 7:12 2026· 30 दिन
  11. तुला17 अक्टूबर, सुबह 7:12 2026 → 16 नवंबर, सुबह 6:04 2026· 30 दिन
  12. वृश्चिक16 नवंबर, सुबह 6:04 2026 → 15 दिसंबर, रात 8:45 2026· 30 दिन
  13. धनु15 दिसंबर, रात 8:45 2026 → 14 जनवरी, सुबह 7:30 2027· 29 दिन

तारीखवार

सभी समय सिएटल के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।

जनवरी 2026

  • 14 जनवरीरात 1:29

    सूर्य का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2026

  • 12 फ़रवरीदोपहर 2:30

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2026

  • 14 मार्चदोपहर 12:24

    सूर्य का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2026

  • 13 अप्रैलरात 8:54

    सूर्य का मेष में प्रवेश

मई 2026

  • 14 मईशाम 5:43

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

जून 2026

  • 15 जूनरात 12:13

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2026

  • 16 जुलाईसुबह 10:59

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2026

  • 16 अगस्तशाम 7:18

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2026

  • 16 सितंबरशाम 7:13

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 2026

  • 17 अक्टूबरसुबह 7:12

    सूर्य का तुला में प्रवेश

नवंबर 2026

  • 16 नवंबरसुबह 6:04

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2026

  • 15 दिसंबररात 8:45

    सूर्य का धनु में प्रवेश

यह भी देखें: सूर्य (शब्दकोश) · गोचर 2026: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और