पंचांग · गोचर
गोचर 1974: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1974 में गुरु (बृहस्पति) 9 फ़रवरी को कुम्भ में, राहु 25 मार्च को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 1974 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1973 से, 14 जनवरी 1974 तक
- चन्द्रमीन में31 दिसंबर 1973 से, 2 जनवरी 1974 तक
- मंगलमेष में30 जुलाई 1973 से, 15 फ़रवरी 1974 तक
- बुधधनु में24 दिसंबर 1973 से, 12 जनवरी 1974 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में25 जनवरी 1973 से, 9 फ़रवरी 1974 तक
- शुक्रमकर में30 नवंबर 1973 से, 31 मार्च 1974 तक
- शनिवक्रीमिथुन में10 जून 1973 से, 23 जुलाई 1975 तक
- राहुधनु में5 सितंबर 1972 से, 25 मार्च 1974 तक
- केतुमिथुन में5 सितंबर 1972 से, 25 मार्च 1974 तक
1974 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1974
3 जनवरीसुबह 11:35
शुक्र मकर 17°53′ पर वक्री
12 जनवरीसुबह 11:52
बुध का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 6:51
सूर्य का मकर में प्रवेश
19 जनवरीसुबह 4:12
शुक्र अस्त (29 जनवरी तक)†
29 जनवरीरात 1:46
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीरात 3:30
बुध का कुम्भ में प्रवेश
30 जनवरीसुबह 8:36
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीशाम 4:15
गुरु (बृहस्पति) अस्त (28 फ़रवरी तक)†
फ़रवरी 1974
9 फ़रवरीसुबह 9:34
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीशाम 7:48
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीदोपहर 12:59
शुक्र मकर 2°19′ पर मार्गी
15 फ़रवरीदोपहर 3:26
मंगल का वृषभ में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 1:14
बुध कुम्भ 18°21′ पर वक्री
18 फ़रवरीदोपहर 1:38
बुध अस्त (3 मार्च तक)†
28 फ़रवरीरात 3:12
शनि मिथुन 4°17′ पर मार्गी
28 फ़रवरीसुबह 4:52
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
मार्च 1974
3 मार्चरात 2:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 मार्चरात 3:46
बुध कुम्भ 3°39′ पर मार्गी
14 मार्चशाम 4:40
सूर्य का मीन में प्रवेश
25 मार्चशाम 7:56
राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
25 मार्चशाम 7:56
केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
31 मार्चरात 3:50
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 1974
7 अप्रैलदोपहर 3:40
बुध का मीन में प्रवेश
9 अप्रैलदोपहर 2:12
मंगल का मिथुन में प्रवेश
14 अप्रैलरात 1:10
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलदोपहर 3:59
बुध अस्त (17 मई तक)†
25 अप्रैलरात 2:26
बुध का मेष में प्रवेश
29 अप्रैलरात 3:58
शुक्र का मीन में प्रवेश
मई 1974
9 मईसुबह 9:19
बुध का वृषभ में प्रवेश
14 मईरात 10:03
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईसुबह 5:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मईरात 1:08
बुध का मिथुन में प्रवेश
25 मईरात 9:06
शुक्र का मेष में प्रवेश
29 मईदोपहर 2:14
मंगल का कर्क में प्रवेश
जून 1974
12 जूनदोपहर 1:25
शनि अस्त (18 जुलाई तक)†
15 जूनसुबह 4:40
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनसुबह 4:06
बुध मिथुन 20°09′ पर वक्री
20 जूनशाम 4:42
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
22 जूनरात 9:15
बुध अस्त (9 जुलाई तक)†
जुलाई 1974
7 जुलाईरात 9:25
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 24°22′ पर वक्री
9 जुलाईदोपहर 12:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जुलाईसुबह 7:26
बुध मिथुन 10°54′ पर मार्गी
15 जुलाईरात 11:50
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 3:32
सूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुलाईसुबह 9:27
मंगल का सिंह में प्रवेश
18 जुलाईरात 10:25
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
अगस्त 1974
2 अगस्तसुबह 4:08
बुध का कर्क में प्रवेश
4 अगस्तसुबह 7:00
बुध अस्त (2 सितंबर तक)†
9 अगस्तरात 9:04
शुक्र का कर्क में प्रवेश
16 अगस्तरात 11:55
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तसुबह 8:07
बुध का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तशाम 5:32
मंगल अस्त (6 दिसंबर तक)†
सितंबर 1974
2 सितंबरसुबह 9:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
2 सितंबरदोपहर 12:17
बुध का कन्या में प्रवेश
2 सितंबररात 10:19
मंगल का कन्या में प्रवेश
3 सितंबरसुबह 9:27
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबररात 11:50
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबरशाम 6:46
बुध का तुला में प्रवेश
27 सितंबरदोपहर 2:42
शुक्र का कन्या में प्रवेश
29 सितंबररात 2:00
शुक्र अस्त (17 दिसंबर तक)†
अक्टूबर 1974
14 अक्टूबररात 1:17
बुध तुला 17°08′ पर वक्री
17 अक्टूबरसुबह 11:48
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरशाम 7:48
मंगल का तुला में प्रवेश
20 अक्टूबररात 3:05
बुध अस्त (31 अक्टूबर तक)†
21 अक्टूबरदोपहर 3:12
शुक्र का तुला में प्रवेश
31 अक्टूबरशाम 6:28
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अक्टूबरशाम 7:56
शनि मिथुन 25°25′ पर वक्री
नवंबर 1974
3 नवंबरशाम 5:58
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 14°29′ पर मार्गी
3 नवंबरशाम 6:21
बुध तुला 1°22′ पर मार्गी
14 नवंबरदोपहर 1:16
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 11:37
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबरदोपहर 12:01
बुध अस्त (12 जनवरी तक)†
28 नवंबरसुबह 7:43
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1974
1 दिसंबररात 8:36
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
6 दिसंबरसुबह 11:23
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
8 दिसंबरसुबह 10:29
शुक्र का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 2:17
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरदोपहर 12:04
बुध का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरशाम 4:22
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
