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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1983: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1983 में राहु 13 जुलाई को वृषभ में, गुरु (बृहस्पति) 22 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1983 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1983 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1983

  • 7 जनवरीसुबह 8:29

    बुध मकर 8°58′ पर वक्री

  • 9 जनवरीदोपहर 3:39

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 जनवरीदोपहर 2:30

    बुध अस्त (21 जनवरी तक)†

  • 14 जनवरीदोपहर 2:21

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीशाम 6:00

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 जनवरीरात 8:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 जनवरीरात 8:15

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 जनवरीशाम 6:55

    बुध धनु 22°52′ पर मार्गी

फ़रवरी 1983

  • 8 फ़रवरीरात 9:40

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीशाम 4:16

    शनि तुला 10°49′ पर वक्री

  • 13 फ़रवरीरात 3:21

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीरात 11:52

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीरात 11:07

    शुक्र का मीन में प्रवेश

मार्च 1983

  • 3 मार्चसुबह 10:25

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चसुबह 10:38

    बुध अस्त (9 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चसुबह 9:19

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 15 मार्चरात 12:15

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चशाम 6:25

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 27 मार्चदोपहर 1:51

    मंगल अस्त (3 अगस्त तक)†

  • 28 मार्चसुबह 5:07

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 17°18′ पर वक्री

  • 28 मार्चसुबह 6:24

    मंगल का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1983

  • 4 अप्रैलशाम 5:12

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 8 अप्रैलसुबह 7:32

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 9 अप्रैलसुबह 8:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अप्रैलसुबह 8:47

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 25 अप्रैलसुबह 11:14

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 1983

  • 1 मईरात 10:05

    बुध वृषभ 1°56′ पर वक्री

  • 4 मईरात 1:16

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 4 मईदोपहर 12:34

    बुध अस्त (21 मई तक)†

  • 8 मईसुबह 4:21

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 8 मईरात 10:47

    बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 मईसुबह 5:41

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईरात 1:11

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मईशाम 6:19

    बुध मेष 22°48′ पर मार्गी

  • 31 मईसुबह 7:43

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जून 1983

  • 8 जूनरात 10:20

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 जूनदोपहर 12:17

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनरात 2:48

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 27 जूनशाम 4:17

    बुध अस्त (22 जुलाई तक)†

  • 28 जूनरात 9:37

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 1983

  • 1 जुलाईशाम 6:34

    शनि तुला 4°06′ पर मार्गी

  • 1 जुलाईरात 10:05

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 13 जुलाईरात 12:58

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 13 जुलाईदोपहर 1:37

    राहु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 जुलाईदोपहर 1:37

    केतु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 जुलाईरात 11:10

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 22 जुलाईरात 9:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 जुलाईशाम 5:52

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 29 जुलाईदोपहर 12:51

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 7°27′ पर मार्गी

अगस्त 1983

  • 3 अगस्तरात 12:04

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 अगस्तरात 1:12

    शुक्र सिंह 15°52′ पर वक्री

  • 4 अगस्तरात 2:53

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 7:36

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तरात 1:42

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 20 अगस्तसुबह 7:32

    शुक्र अस्त (30 अगस्त तक)†

  • 30 अगस्तदोपहर 12:13

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

सितंबर 1983

  • 2 सितंबरदोपहर 12:10

    बुध कन्या 7°07′ पर वक्री

  • 9 सितंबरदोपहर 2:49

    बुध अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 11 सितंबरसुबह 7:20

    शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 सितंबरदोपहर 1:04

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 सितंबररात 10:53

    शुक्र कर्क 29°34′ पर मार्गी

  • 17 सितंबरसुबह 7:33

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबररात 12:42

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 20 सितंबरशाम 4:38

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 22 सितंबरशाम 4:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 सितंबररात 2:19

    बुध सिंह 22°46′ पर मार्गी

अक्टूबर 1983

  • 4 अक्टूबररात 9:41

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 10 अक्टूबररात 11:24

    बुध अस्त (25 नवंबर तक)†

  • 14 अक्टूबरसुबह 8:08

    शनि अस्त (17 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरशाम 7:29

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबररात 2:43

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 1983

  • 3 नवंबरसुबह 9:30

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 7 नवंबररात 10:22

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 10 नवंबरदोपहर 12:06

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरशाम 7:13

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबरसुबह 10:26

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 नवंबररात 3:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 नवंबरसुबह 6:18

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 30 नवंबरशाम 7:52

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (28 दिसंबर तक)†

दिसंबर 1983

  • 1 दिसंबरसुबह 8:11

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 9:45

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 22 दिसंबररात 3:04

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

  • 22 दिसंबरसुबह 6:22

    बुध धनु 23°01′ पर वक्री

  • 25 दिसंबररात 10:56

    बुध अस्त (5 जनवरी तक)†

  • 26 दिसंबररात 11:59

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 दिसंबरदोपहर 3:51

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 दिसंबरसुबह 7:24

    मंगल का तुला में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और