मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1984: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1984 में शनि 21 दिसंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1984 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1984 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1984

  • 5 जनवरीरात 11:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 जनवरीसुबह 6:07

    बुध धनु 6°45′ पर मार्गी

  • 14 जनवरीरात 8:24

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 20 जनवरीशाम 7:16

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 1984

  • 4 फ़रवरीरात 8:29

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 9:21

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीसुबह 6:14

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 19 फ़रवरीदोपहर 3:18

    बुध अस्त (23 मार्च तक)†

  • 24 फ़रवरीसुबह 6:52

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीशाम 7:34

    शनि तुला 22°45′ पर वक्री

मार्च 1984

  • 6 मार्चरात 10:30

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 9 मार्चदोपहर 2:13

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 11 मार्चशाम 4:28

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 6:15

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 23 मार्चशाम 4:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 मार्चदोपहर 1:09

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1984

  • 2 अप्रैलरात 9:47

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 5 अप्रैलशाम 5:47

    मंगल वृश्चिक 4°43′ पर वक्री

  • 12 अप्रैलरात 1:53

    बुध मेष 13°04′ पर वक्री

  • 13 अप्रैलदोपहर 2:50

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 10:00

    बुध अस्त (30 अप्रैल तक)†

  • 27 अप्रैलसुबह 6:14

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 29 अप्रैलरात 11:49

    गुरु (बृहस्पति) धनु 19°20′ पर वक्री

  • 30 अप्रैलरात 12:03

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 1984

  • 3 मईसुबह 11:32

    मंगल का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 मईशाम 7:36

    बुध मेष 2°40′ पर मार्गी

  • 9 मईरात 11:18

    शुक्र अस्त (22 जुलाई तक)†

  • 14 मईसुबह 11:48

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईदोपहर 3:49

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

जून 1984

  • 4 जूनसुबह 5:00

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 11 जूनसुबह 5:06

    बुध अस्त (5 जुलाई तक)†

  • 14 जूनशाम 6:29

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनरात 1:58

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जूनदोपहर 2:19

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जूनरात 11:50

    मंगल तुला 18°04′ पर मार्गी

जुलाई 1984

  • 3 जुलाईशाम 4:50

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 5 जुलाईशाम 7:02

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 जुलाईसुबह 11:48

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 13 जुलाईदोपहर 12:19

    शनि तुला 16°04′ पर मार्गी

  • 16 जुलाईसुबह 5:25

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 21 जुलाईदोपहर 1:52

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 22 जुलाईसुबह 10:59

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

अगस्त 1984

  • 2 अगस्तरात 9:04

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 5 अगस्तसुबह 4:16

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 अगस्तरात 1:03

    बुध सिंह 19°46′ पर वक्री

  • 16 अगस्तदोपहर 1:52

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 22 अगस्तसुबह 4:19

    बुध अस्त (5 सितंबर तक)†

  • 27 अगस्तसुबह 6:24

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 30 अगस्तसुबह 4:48

    गुरु (बृहस्पति) धनु 9°29′ पर मार्गी

सितंबर 1984

  • 5 सितंबररात 1:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 सितंबरसुबह 9:32

    बुध सिंह 6°23′ पर मार्गी

  • 16 सितंबरदोपहर 1:49

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबरशाम 4:58

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 23 सितंबरसुबह 7:50

    बुध अस्त (3 नवंबर तक)†

  • 26 सितंबररात 2:31

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 27 सितंबरदोपहर 12:49

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 1984

  • 14 अक्टूबरदोपहर 12:29

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 15 अक्टूबरसुबह 5:57

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबररात 1:45

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 25 अक्टूबरदोपहर 12:37

    शनि अस्त (28 नवंबर तक)†

नवंबर 1984

  • 2 नवंबरसुबह 10:53

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 3 नवंबररात 2:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 नवंबरसुबह 10:36

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 8 नवंबररात 10:54

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 1:30

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 24 नवंबरसुबह 8:43

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 28 नवंबरसुबह 8:42

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

दिसंबर 1984

  • 3 दिसंबररात 11:45

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 5 दिसंबररात 3:16

    बुध धनु 7°10′ पर वक्री

  • 9 दिसंबरसुबह 8:02

    बुध अस्त (20 दिसंबर तक)†

  • 14 दिसंबरसुबह 5:10

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 दिसंबरशाम 4:03

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 17 दिसंबरसुबह 4:27

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 दिसंबरसुबह 6:54

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 दिसंबरसुबह 8:46

    शनि का वृश्चिक में प्रवेश

  • 24 दिसंबररात 9:41

    बुध वृश्चिक 20°52′ पर मार्गी

  • 29 दिसंबरशाम 7:43

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और