पंचांग · गोचर
गोचर 1982: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1982 में शनि 6 अक्टूबर को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 26 नवंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 1982 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1981 से, 14 जनवरी 1982 तक
- चन्द्रकुम्भ में30 दिसंबर 1981 से, 2 जनवरी 1982 तक
- मंगलकन्या में3 दिसंबर 1981 से, 23 जुलाई 1982 तक
- बुधधनु में14 दिसंबर 1981 से, 1 जनवरी 1982 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में27 अक्टूबर 1981 से, 26 नवंबर 1982 तक
- शुक्रमकर में30 नवंबर 1981 से, 7 फ़रवरी 1982 तक
- शनिकन्या में27 जुलाई 1980 से, 6 अक्टूबर 1982 तक
- राहुमिथुन में24 दिसंबर 1981 से, 13 जुलाई 1983 तक
- केतुधनु में24 दिसंबर 1981 से, 13 जुलाई 1983 तक
1982 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1982
1 जनवरीरात 1:13
शुक्र मकर 15°18′ पर वक्री
1 जनवरीरात 9:37
बुध का मकर में प्रवेश
4 जनवरीसुबह 4:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 8:12
सूर्य का मकर में प्रवेश
16 जनवरीशाम 5:00
शुक्र अस्त (26 जनवरी तक)†
23 जनवरीसुबह 11:32
बुध मकर 25°02′ पर वक्री
26 जनवरीसुबह 8:52
बुध अस्त (7 फ़रवरी तक)†
26 जनवरीदोपहर 2:35
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
31 जनवरीसुबह 8:45
शनि कन्या 28°38′ पर वक्री
फ़रवरी 1982
7 फ़रवरीरात 12:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 फ़रवरीदोपहर 3:48
शुक्र का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
11 फ़रवरीरात 2:08
शुक्र धनु 29°46′ पर मार्गी
12 फ़रवरीरात 9:14
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीदोपहर 12:48
बुध मकर 9°19′ पर मार्गी
14 फ़रवरीदोपहर 1:49
शुक्र का मकर में प्रवेश
21 फ़रवरीरात 12:38
मंगल कन्या 25°35′ पर वक्री
24 फ़रवरीसुबह 10:54
गुरु (बृहस्पति) तुला 16°44′ पर वक्री
मार्च 1982
9 मार्चसुबह 11:55
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चशाम 6:10
सूर्य का मीन में प्रवेश
28 मार्चसुबह 6:03
बुध अस्त (24 अप्रैल तक)†
28 मार्चदोपहर 2:07
बुध का मीन में प्रवेश
31 मार्चसुबह 7:22
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
अप्रैल 1982
12 अप्रैलरात 11:30
बुध का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलरात 2:43
सूर्य का मेष में प्रवेश
24 अप्रैलरात 9:22
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अप्रैलरात 9:01
बुध का वृषभ में प्रवेश
28 अप्रैलरात 11:19
शुक्र का मीन में प्रवेश
मई 1982
12 मईरात 12:09
मंगल कन्या 6°46′ पर मार्गी
14 मईरात 11:36
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
21 मईसुबह 7:34
बुध वृषभ 21°34′ पर वक्री
24 मईदोपहर 12:29
बुध अस्त (10 जून तक)†
25 मईदोपहर 1:33
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 1982
10 जूनदोपहर 1:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जूनसुबह 4:51
बुध वृषभ 13°01′ पर मार्गी
15 जूनसुबह 6:13
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनशाम 5:07
शनि कन्या 21°53′ पर मार्गी
20 जूनसुबह 7:42
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
28 जूनरात 12:04
गुरु (बृहस्पति) तुला 6°50′ पर मार्गी
जुलाई 1982
5 जुलाईशाम 6:38
बुध का मिथुन में प्रवेश
13 जुलाईरात 1:25
बुध अस्त (8 अगस्त तक)†
15 जुलाईदोपहर 1:59
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईशाम 5:06
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईदोपहर 2:15
बुध का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईरात 2:53
मंगल का तुला में प्रवेश
अगस्त 1982
5 अगस्तसुबह 7:41
बुध का सिंह में प्रवेश
8 अगस्तसुबह 10:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 अगस्तसुबह 10:42
शुक्र का कर्क में प्रवेश
17 अगस्तरात 1:29
सूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तदोपहर 2:52
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1982
2 सितंबररात 10:49
शुक्र का सिंह में प्रवेश
10 सितंबरशाम 7:05
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
17 सितंबररात 1:23
सूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सितंबरशाम 4:32
बुध कन्या 23°55′ पर वक्री
26 सितंबरसुबह 11:48
बुध अस्त (8 अक्टूबर तक)†
26 सितंबरशाम 5:40
शुक्र अस्त (15 दिसंबर तक)†
27 सितंबररात 3:57
शुक्र का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 1982
1 अक्टूबरशाम 7:57
शनि अस्त (5 नवंबर तक)†
6 अक्टूबरसुबह 6:42
शनि का तुला में प्रवेश
8 अक्टूबररात 8:59
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 अक्टूबरसुबह 10:51
बुध कन्या 8°49′ पर मार्गी
17 अक्टूबरदोपहर 1:18
सूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टूबरसुबह 4:27
शुक्र का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरदोपहर 1:19
मंगल का धनु में प्रवेश
28 अक्टूबरसुबह 9:56
बुध अस्त (15 दिसंबर तक)†
30 अक्टूबरसुबह 9:16
बुध का तुला में प्रवेश
30 अक्टूबरशाम 6:36
गुरु (बृहस्पति) अस्त (27 नवंबर तक)†
नवंबर 1982
5 नवंबरसुबह 5:23
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 नवंबररात 2:34
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरदोपहर 1:03
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरशाम 7:17
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
26 नवंबरसुबह 6:03
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
27 नवंबरशाम 6:14
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 1982
2 दिसंबरसुबह 6:06
मंगल का मकर में प्रवेश
6 दिसंबररात 10:47
बुध का धनु में प्रवेश
7 दिसंबररात 11:49
शुक्र का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 2:36
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
15 दिसंबरशाम 5:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 दिसंबररात 3:38
सूर्य का धनु में प्रवेश
27 दिसंबररात 12:32
बुध का मकर में प्रवेश
31 दिसंबररात 9:16
शुक्र का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
