पंचांग · गोचर
गोचर 2033: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2033 में राहु 16 फ़रवरी को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 18 मार्च को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
1 जनवरी 2033 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2032 से, 14 जनवरी 2033 तक
- चन्द्रधनु में31 दिसंबर 2032 से, 2 जनवरी 2033 तक
- मंगलतुला में8 दिसंबर 2032 से, 27 जनवरी 2033 तक
- बुधधनु में26 दिसंबर 2032 से, 13 जनवरी 2033 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में23 अक्टूबर 2032 से, 18 मार्च 2033 तक
- शुक्रकुम्भ में28 दिसंबर 2032 से, 28 जनवरी 2033 तक
- शनिवक्रीमिथुन में31 मई 2032 से, 13 जुलाई 2034 तक
- राहुतुला में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
- केतुमेष में31 जुलाई 2031 से, 16 फ़रवरी 2033 तक
2033 का गोचर कैलेंडर
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2033
13 जनवरीरात 11:20
बुध का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 10:15
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीरात 12:24
गुरु (बृहस्पति) अस्त (17 फ़रवरी तक)†
27 जनवरीशाम 7:02
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
28 जनवरीरात 8:45
शुक्र का मीन में प्रवेश
31 जनवरीदोपहर 12:46
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 2033
2 फ़रवरीदोपहर 1:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीरात 11:12
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीदोपहर 12:27
राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
16 फ़रवरीदोपहर 12:27
केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
17 फ़रवरीसुबह 8:11
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
19 फ़रवरीरात 3:04
बुध कुम्भ 21°15′ पर वक्री
21 फ़रवरीदोपहर 2:44
बुध अस्त (6 मार्च तक)†
27 फ़रवरीरात 9:24
शुक्र मीन 14°13′ पर वक्री
मार्च 2033
1 मार्चरात 10:16
शनि मिथुन 5°53′ पर मार्गी
6 मार्चसुबह 6:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 मार्चसुबह 8:42
बुध कुम्भ 6°43′ पर मार्गी
14 मार्चरात 8:02
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चरात 10:36
शुक्र अस्त (25 मार्च तक)†
18 मार्चरात 2:14
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
24 मार्चशाम 7:46
मंगल का धनु में प्रवेश
25 मार्चरात 9:37
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मार्चरात 11:55
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
अप्रैल 2033
8 अप्रैलशाम 7:19
बुध का मीन में प्रवेश
10 अप्रैलरात 9:13
शुक्र कुम्भ 28°02′ पर मार्गी
14 अप्रैलसुबह 4:31
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलसुबह 5:13
शुक्र का मीन में प्रवेश
24 अप्रैलशाम 5:32
बुध अस्त (20 मई तक)†
26 अप्रैलशाम 4:24
बुध का मेष में प्रवेश
मई 2033
11 मईरात 1:35
बुध का वृषभ में प्रवेश
15 मईरात 1:23
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
20 मईरात 2:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मईसुबह 6:29
बुध का मिथुन में प्रवेश
27 मईसुबह 5:28
मंगल धनु 18°11′ पर वक्री
31 मईदोपहर 1:01
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2033
14 जूनसुबह 9:04
शनि अस्त (20 जुलाई तक)†
15 जूनसुबह 7:58
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनदोपहर 3:49
बुध मिथुन 23°37′ पर वक्री
26 जूनरात 3:20
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 13°00′ पर वक्री
26 जूनदोपहर 1:57
बुध अस्त (13 जुलाई तक)†
29 जूनसुबह 8:31
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2033
13 जुलाईरात 2:48
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जुलाईरात 8:05
बुध मिथुन 14°11′ पर मार्गी
16 जुलाईशाम 6:49
सूर्य का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईशाम 6:05
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
26 जुलाईरात 12:45
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2033
1 अगस्तरात 8:13
मंगल धनु 5°28′ पर मार्गी
3 अगस्तसुबह 11:38
बुध का कर्क में प्रवेश
7 अगस्तसुबह 4:25
बुध अस्त (5 सितंबर तक)†
17 अगस्तरात 3:13
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तरात 11:35
बुध का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तदोपहर 3:55
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2033
4 सितंबररात 12:04
बुध का कन्या में प्रवेश
5 सितंबरशाम 5:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 सितंबरदोपहर 2:12
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबररात 3:11
सूर्य का कन्या में प्रवेश
23 सितंबरशाम 7:44
बुध का तुला में प्रवेश
अक्टूबर 2033
8 अक्टूबररात 8:16
मंगल का मकर में प्रवेश
9 अक्टूबररात 12:23
शुक्र का कन्या में प्रवेश
17 अक्टूबररात 3:47
बुध तुला 19°56′ पर वक्री
17 अक्टूबरदोपहर 3:11
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबररात 3:16
बुध अस्त (3 नवंबर तक)†
23 अक्टूबरदोपहर 1:20
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 3°08′ पर मार्गी
नवंबर 2033
2 नवंबररात 2:40
शुक्र का तुला में प्रवेश
2 नवंबरदोपहर 12:19
शनि मिथुन 27°00′ पर वक्री
3 नवंबरशाम 4:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 नवंबरशाम 6:24
बुध तुला 4°07′ पर मार्गी
16 नवंबरदोपहर 3:04
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
23 नवंबरदोपहर 3:26
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
23 नवंबररात 11:21
शुक्र अस्त (15 फ़रवरी तक)†
26 नवंबररात 12:43
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
28 नवंबररात 3:21
बुध अस्त (15 जनवरी तक)†
29 नवंबरशाम 4:27
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 2033
16 दिसंबरसुबह 5:48
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबररात 10:49
बुध का धनु में प्रवेश
19 दिसंबररात 9:06
शुक्र का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
