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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2034: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2034 में गुरु (बृहस्पति) 28 मार्च को मीन में, शनि 13 जुलाई को कर्क में, राहु 5 सितंबर को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

1 जनवरी 2034 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2034 का गोचर कैलेंडर

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2034

  • 4 जनवरीरात 10:32

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 6 जनवरीदोपहर 2:53

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 12 जनवरीशाम 5:19

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीशाम 4:34

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीशाम 7:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जनवरीरात 1:27

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 2034

  • 2 फ़रवरीशाम 5:06

    बुध कुम्भ 4°47′ पर वक्री

  • 5 फ़रवरीसुबह 10:19

    बुध अस्त (17 फ़रवरी तक)†

  • 5 फ़रवरीदोपहर 2:32

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 फ़रवरीसुबह 5:34

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 फ़रवरीसुबह 5:33

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीरात 2:02

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 फ़रवरीरात 3:19

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीसुबह 9:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 फ़रवरीसुबह 4:39

    बुध मकर 19°25′ पर मार्गी

  • 24 फ़रवरीसुबह 11:15

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (25 मार्च तक)†

मार्च 2034

  • 1 मार्चदोपहर 2:19

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 12 मार्चसुबह 7:31

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 मार्चरात 2:23

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 8:44

    शनि मिथुन 20°02′ पर मार्गी

  • 25 मार्चदोपहर 12:06

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 मार्चशाम 6:37

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 28 मार्चसुबह 5:40

    गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश

  • 31 मार्चसुबह 10:14

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

अप्रैल 2034

  • 2 अप्रैलसुबह 11:33

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 8 अप्रैलरात 1:15

    बुध अस्त (4 मई तक)†

  • 14 अप्रैलसुबह 10:49

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 18 अप्रैलदोपहर 12:17

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलसुबह 5:30

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

मई 2034

  • 2 मईशाम 6:46

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 4 मईशाम 4:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मईरात 1:07

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 5:14

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 7:36

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 23 मईरात 8:01

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 2034

  • 2 जूनसुबह 11:07

    बुध मिथुन 3°35′ पर वक्री

  • 6 जूनसुबह 5:51

    बुध अस्त (23 जून तक)†

  • 8 जूनसुबह 8:54

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 13 जूनसुबह 4:18

    बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 15 जूनदोपहर 2:07

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 6:16

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 जूनसुबह 11:09

    बुध वृषभ 24°56′ पर मार्गी

  • 26 जूनशाम 7:37

    मंगल अस्त (9 अक्टूबर तक)†

  • 29 जूनसुबह 11:06

    शनि अस्त (4 अगस्त तक)†

  • 30 जूनसुबह 8:43

    मंगल का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2034

  • 4 जुलाईदोपहर 12:22

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 7 जुलाईशाम 5:06

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 13 जुलाईरात 3:53

    शनि का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईरात 12:56

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 22 जुलाईशाम 6:52

    बुध अस्त (19 अगस्त तक)†

  • 27 जुलाईरात 2:21

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2034

  • 1 अगस्तसुबह 7:16

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 3 अगस्तसुबह 9:09

    गुरु (बृहस्पति) मीन 19°37′ पर वक्री

  • 4 अगस्तशाम 7:03

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 अगस्तशाम 4:09

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 16 अगस्तसुबह 7:52

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तसुबह 9:19

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तरात 3:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अगस्तरात 8:01

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2034

  • 3 सितंबरसुबह 8:30

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 5 सितंबरदोपहर 3:25

    राहु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 सितंबरदोपहर 3:25

    केतु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 सितंबरसुबह 9:17

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबरसुबह 9:39

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 30 सितंबरसुबह 8:44

    बुध तुला 3°47′ पर वक्री

अक्टूबर 2034

  • 1 अक्टूबररात 1:20

    शुक्र तुला 11°47′ पर वक्री

  • 2 अक्टूबरसुबह 10:05

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 6 अक्टूबररात 9:38

    बुध अस्त (18 अक्टूबर तक)†

  • 8 अक्टूबरसुबह 4:03

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 9 अक्टूबररात 12:25

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अक्टूबररात 9:41

    शुक्र अस्त (26 अक्टूबर तक)†

  • 17 अक्टूबररात 9:18

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 10:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 अक्टूबरशाम 4:07

    बुध कन्या 18°22′ पर मार्गी

  • 26 अक्टूबररात 11:19

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अक्टूबररात 8:49

    शुक्र का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 2034

  • 3 नवंबरदोपहर 3:39

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 8 नवंबररात 8:43

    बुध अस्त (28 दिसंबर तक)†

  • 11 नवंबरशाम 7:48

    शुक्र कन्या 26°07′ पर मार्गी

  • 16 नवंबरशाम 5:16

    शनि कर्क 11°02′ पर वक्री

  • 16 नवंबररात 9:10

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 नवंबररात 2:17

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 22 नवंबरशाम 4:01

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 26 नवंबरसुबह 10:38

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 29 नवंबरसुबह 8:25

    गुरु (बृहस्पति) मीन 9°41′ पर मार्गी

दिसंबर 2034

  • 11 दिसंबरशाम 5:03

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 11:53

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 28 दिसंबररात 12:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 दिसंबरशाम 6:35

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और