पंचांग · गोचर · बुध
2036 में बुध का गोचर
2036 में बुध 15 बार राशि बदलता है: 6 जनवरी को धनु (वक्री, पीछे की ओर), 8 फ़रवरी को मकर, 29 फ़रवरी को कुम्भ, 17 मार्च को मीन …। वक्री: 1 जनवरी, 23 अप्रैल, 26 अगस्त, 15 दिसंबर से।
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
2036 में बुध किन राशियों में है
- मकर26 दिसंबर, शाम 7:14 2035 → 6 जनवरी, दोपहर 1:56 2036· 11 दिन
- धनु(वक्री गति से प्रवेश)6 जनवरी, दोपहर 1:56 2036 → 8 फ़रवरी, सुबह 7:53 2036· 33 दिन
- मकर8 फ़रवरी, सुबह 7:53 2036 → 29 फ़रवरी, रात 3:39 2036· 21 दिन
- कुम्भ29 फ़रवरी, रात 3:39 2036 → 17 मार्च, रात 1:05 2036· 17 दिन
- मीन17 मार्च, रात 1:05 2036 → 1 अप्रैल, रात 2:36 2036· 15 दिन
- मेष1 अप्रैल, रात 2:36 2036 → 7 जून, शाम 7:56 2036· लगभग 2 महीने
- वृषभ7 जून, शाम 7:56 2036 → 25 जून, रात 3:54 2036· 17 दिन
- मिथुन25 जून, रात 3:54 2036 → 9 जुलाई, रात 3:33 2036· 14 दिन
- कर्क9 जुलाई, रात 3:33 2036 → 25 जुलाई, दोपहर 12:26 2036· 16 दिन
- सिंह25 जुलाई, दोपहर 12:26 2036 → 23 अगस्त, दोपहर 3:24 2036· 29 दिन
- कन्या23 अगस्त, दोपहर 3:24 2036 → 28 अगस्त, सुबह 10:04 2036· 5 दिन
- सिंह(वक्री गति से प्रवेश)28 अगस्त, सुबह 10:04 2036 → 2 अक्टूबर, सुबह 5:19 2036· 35 दिन
- कन्या2 अक्टूबर, सुबह 5:19 2036 → 19 अक्टूबर, दोपहर 1:48 2036· 17 दिन
- तुला19 अक्टूबर, दोपहर 1:48 2036 → 7 नवंबर, रात 3:00 2036· 19 दिन
- वृश्चिक7 नवंबर, रात 3:00 2036 → 27 नवंबर, सुबह 9:50 2036· 20 दिन
- धनु27 नवंबर, सुबह 9:50 2036 → 1 फ़रवरी, रात 10:30 2037· लगभग 2 महीने
तारीखवार
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
जनवरी 2036
1 जनवरीसुबह 10:09
बुध मकर 2°35′ पर वक्री
4 जनवरीरात 8:07
बुध अस्त (15 जनवरी तक)†
6 जनवरीदोपहर 1:56
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
15 जनवरीरात 11:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 जनवरीदोपहर 3:27
बुध धनु 16°23′ पर मार्गी
फ़रवरी 2036
8 फ़रवरीसुबह 7:53
बुध का मकर में प्रवेश
29 फ़रवरीरात 3:39
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2036
2 मार्चदोपहर 12:58
बुध अस्त (2 अप्रैल तक)†
17 मार्चरात 1:05
बुध का मीन में प्रवेश
अप्रैल 2036
1 अप्रैलरात 2:36
बुध का मेष में प्रवेश
2 अप्रैलदोपहर 2:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अप्रैलशाम 7:02
बुध मेष 24°16′ पर वक्री
26 अप्रैलसुबह 5:56
बुध अस्त (12 मई तक)†
मई 2036
12 मईसुबह 10:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 मईदोपहर 2:15
बुध मेष 14°41′ पर मार्गी
जून 2036
7 जूनशाम 7:56
बुध का वृषभ में प्रवेश
21 जूनरात 12:17
बुध अस्त (15 जुलाई तक)†
25 जूनरात 3:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2036
9 जुलाईरात 3:33
बुध का कर्क में प्रवेश
15 जुलाईरात 10:01
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जुलाईदोपहर 12:26
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2036
23 अगस्तदोपहर 3:24
बुध का कन्या में प्रवेश
26 अगस्तरात 1:32
बुध कन्या 0°16′ पर वक्री
28 अगस्तसुबह 10:04
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
सितंबर 2036
2 सितंबरसुबह 5:13
बुध अस्त (15 सितंबर तक)†
15 सितंबरदोपहर 2:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 सितंबररात 11:05
बुध सिंह 16°16′ पर मार्गी
अक्टूबर 2036
2 अक्टूबरसुबह 5:19
बुध का कन्या में प्रवेश
3 अक्टूबरशाम 5:39
बुध अस्त (16 नवंबर तक)†
19 अक्टूबरदोपहर 1:48
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2036
7 नवंबररात 3:00
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 5:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 नवंबरसुबह 9:50
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2036
15 दिसंबरसुबह 7:50
बुध धनु 16°41′ पर वक्री
19 दिसंबरसुबह 5:03
बुध अस्त (30 दिसंबर तक)†
30 दिसंबरसुबह 4:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।
यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 2036: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
