पंचांग · गोचर
गोचर 2036: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2036 में राहु 24 मार्च को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 15 अप्रैल को वृषभ में, शनि 27 अगस्त को सिंह में, गुरु (बृहस्पति) 10 सितंबर को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 17 नवंबर को वृषभ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।
1 जनवरी 2036 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2035 से, 15 जनवरी 2036 तक
- चन्द्रमकर में31 दिसंबर 2035 से, 2 जनवरी 2036 तक
- मंगलमीन में18 नवंबर 2035 से, 16 जनवरी 2036 तक
- बुधमकर में26 दिसंबर 2035 से, 6 जनवरी 2036 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीमेष में6 अप्रैल 2035 से, 15 अप्रैल 2036 तक
- शुक्रमकर में14 दिसंबर 2035 से, 8 जनवरी 2036 तक
- शनिवक्रीकर्क में13 जुलाई 2034 से, 27 अगस्त 2036 तक
- राहुसिंह में5 सितंबर 2034 से, 24 मार्च 2036 तक
- केतुकुम्भ में5 सितंबर 2034 से, 24 मार्च 2036 तक
2036 का गोचर कैलेंडर
सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2036
1 जनवरीसुबह 10:09
बुध मकर 2°35′ पर वक्री
4 जनवरीरात 8:07
बुध अस्त (15 जनवरी तक)†
5 जनवरीसुबह 9:59
गुरु (बृहस्पति) मेष 16°21′ पर मार्गी
6 जनवरीदोपहर 1:56
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
8 जनवरीसुबह 10:28
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 4:53
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीरात 11:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जनवरीरात 11:56
मंगल का मेष में प्रवेश
21 जनवरीदोपहर 3:27
बुध धनु 16°23′ पर मार्गी
फ़रवरी 2036
2 फ़रवरीसुबह 10:51
शुक्र का मीन में प्रवेश
8 फ़रवरीसुबह 7:53
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीशाम 5:52
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीदोपहर 3:26
शुक्र का मेष में प्रवेश
29 फ़रवरीरात 3:39
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2036
2 मार्चदोपहर 12:58
बुध अस्त (2 अप्रैल तक)†
6 मार्चसुबह 7:09
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 मार्चदोपहर 2:45
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चरात 1:05
बुध का मीन में प्रवेश
24 मार्चशाम 6:23
राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
24 मार्चशाम 6:23
केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
28 मार्चरात 10:31
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
अप्रैल 2036
1 अप्रैलरात 2:36
बुध का मेष में प्रवेश
2 अप्रैलदोपहर 2:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 अप्रैलसुबह 4:52
शनि कर्क 17°58′ पर मार्गी
13 अप्रैलरात 11:12
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलसुबह 4:06
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 6:28
मंगल का मिथुन में प्रवेश
23 अप्रैलशाम 7:02
बुध मेष 24°16′ पर वक्री
26 अप्रैलसुबह 5:56
बुध अस्त (12 मई तक)†
मई 2036
8 मईरात 9:41
शुक्र वृषभ 23°10′ पर वक्री
9 मईरात 2:22
गुरु (बृहस्पति) अस्त (8 जून तक)†
12 मईसुबह 10:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईरात 8:01
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईदोपहर 2:15
बुध मेष 14°41′ पर मार्गी
25 मईसुबह 5:54
शुक्र अस्त (4 जून तक)†
जून 2036
4 जूनसुबह 10:30
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
7 जूनशाम 7:56
बुध का वृषभ में प्रवेश
8 जूनसुबह 8:33
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
10 जूनसुबह 5:18
मंगल का कर्क में प्रवेश
15 जूनरात 2:34
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनशाम 7:58
शुक्र वृषभ 6°40′ पर मार्गी
21 जूनरात 12:17
बुध अस्त (15 जुलाई तक)†
25 जूनरात 3:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2036
9 जुलाईरात 3:33
बुध का कर्क में प्रवेश
15 जुलाईरात 10:01
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईदोपहर 1:25
सूर्य का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईदोपहर 12:26
बुध का सिंह में प्रवेश
28 जुलाईरात 1:57
मंगल का सिंह में प्रवेश
28 जुलाईसुबह 4:22
शनि अस्त (2 सितंबर तक)†
अगस्त 2036
1 अगस्तशाम 6:03
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
3 अगस्तसुबह 4:51
मंगल अस्त (13 नवंबर तक)†
16 अगस्तरात 9:48
सूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तदोपहर 3:24
बुध का कन्या में प्रवेश
26 अगस्तरात 1:32
बुध कन्या 0°16′ पर वक्री
27 अगस्तरात 8:41
शनि का सिंह में प्रवेश
28 अगस्तसुबह 10:04
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
31 अगस्तशाम 4:46
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2036
2 सितंबररात 3:32
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
2 सितंबरसुबह 5:13
बुध अस्त (15 सितंबर तक)†
10 सितंबररात 12:00
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
13 सितंबरसुबह 7:09
मंगल का कन्या में प्रवेश
15 सितंबरदोपहर 2:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 सितंबररात 9:45
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 11:05
बुध सिंह 16°16′ पर मार्गी
27 सितंबरसुबह 9:27
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2036
2 अक्टूबरसुबह 5:19
बुध का कन्या में प्रवेश
3 अक्टूबरशाम 5:39
बुध अस्त (16 नवंबर तक)†
14 अक्टूबरसुबह 7:06
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 1°52′ पर वक्री
17 अक्टूबरसुबह 9:44
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरदोपहर 1:48
बुध का तुला में प्रवेश
22 अक्टूबरशाम 4:28
शुक्र का कन्या में प्रवेश
29 अक्टूबरसुबह 7:22
मंगल का तुला में प्रवेश
नवंबर 2036
7 नवंबररात 3:00
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
13 नवंबरदोपहर 3:04
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरसुबह 5:24
शुक्र का तुला में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 5:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरसुबह 9:35
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 6:07
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
27 नवंबरसुबह 9:50
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2036
10 दिसंबरसुबह 8:55
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
12 दिसंबरशाम 7:29
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
13 दिसंबरसुबह 8:13
शनि सिंह 8°31′ पर वक्री
15 दिसंबरसुबह 7:50
बुध धनु 16°41′ पर वक्री
16 दिसंबररात 12:15
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबरसुबह 5:03
बुध अस्त (30 दिसंबर तक)†
30 दिसंबरसुबह 4:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
