वास्तुपुरुष
Vāstu puruṣa
बोलचाल की हिन्दी: वास्तु पुरुष
भूखंड पर लेटी हुई कल्पित आकृति, जो देवताओं के ग्रिड को दर्शाती है।
परिभाषा
वास्तु पुरुष वह ब्रह्मांडीय आकृति है जिसे वास्तु ग्रंथ प्रत्येक भवन-स्थल पर औंधे मुँह लेटा हुआ बताते हैं, जिसका सिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) की ओर है। उसके शरीर पर वास्तु-पुरुष-मंडल का आवरण है, जो प्रायः 64 या 81 खानों का वर्गाकार ग्रिड है और जिसका प्रत्येक खाना लगभग पैंतालीस देवताओं में से किसी एक को सौंपा गया है। बृहत्संहिता का वास्तु अध्याय, मयमत और मानसार इस मंडल का प्रयोग योजना बनाने और कक्षों की स्थिति तय करने में करते हैं।
