शब्दकोश
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150 शब्द
अ
- अधिकमासAdhika māsaअतिरिक्त चांद्र मास, जब उसके भीतर कोई संक्रांति न पड़े।पंचांग
- अन्तर्दशाAntardaśā (Bhukti)महादशा के भीतर की उप-अवधि, जिसे भुक्ति भी कहते हैं।ज्योतिष · होरा
- अभिजित्Abhijitमध्याह्न का मुहूर्त, और मुहूर्त ग्रंथों में अट्ठाईसवाँ नक्षत्र।पंचांग
- अमावास्याAmāvāsyāअमावस्या: कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि।पंचांग
- अयनAyanaसूर्य का अर्धवार्षिक मार्ग: उत्तरायण या दक्षिणायन।पंचांग
- अयनांशAyanāṃśaसायन और निरयन राशिचक्रों के बीच अयन-चलन से उत्पन्न अंतर।सिद्धांत
- अरिभावAri bhāva (Ripu, Śatru bhāva)षष्ठ भाव: शत्रु, ऋण, रोग, सेवा और दैनिक कार्य।ज्योतिष · होरा
- अष्टकवर्गAṣṭakavargaआठ स्रोतों से प्रत्येक राशि को अंक देने वाली पद्धति।ज्योतिष · होरा
- अष्टकूटAṣṭakūṭaदो जन्म-कुंडलियों की तुलना की आठ-कूट, 36-अंक पद्धति।ज्योतिष · होरा
आ
- आत्मकारकĀtmakārakaजैमिनि पद्धति में, अपनी राशि में सबसे अधिक अंश पर स्थित ग्रह।ज्योतिष · होरा
- आपोक्लिमĀpoklimaपतनशील भाव 3, 6, 9 और 12, जो केंद्रों से पहले आते हैं।ज्योतिष · होरा
- आयुर्भावĀyur bhāva (Randhra, Mṛtyu bhāva)अष्टम भाव: आयु, गुप्त विषय, उत्तराधिकार और आकस्मिक परिवर्तन।ज्योतिष · होरा
- आयुर्वेदĀyurvedaजीवन का ज्ञान: भारत की शास्त्रीय चिकित्सा-पद्धति।आयुर्वेद
- आर्यभटĀryabhaṭaखगोलशास्त्री-गणितज्ञ (जन्म 476 ई.), आर्यभटीय के रचयिता।इतिहास
- आसनĀsanaआसन: पतंजलि के अष्टांग योग का तीसरा अंग।योग
उ
ऋ
ए
क
- कन्याKanyāकन्या: षष्ठ राशि, पृथ्वी तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी बुध।ज्योतिष · होरा
- कफKapha (Śleṣman)संरचना और संसक्ति का दोष, जो जल और पृथ्वी से बना है।आयुर्वेद
- करणKaraṇaआधी तिथि; ग्यारह करण, चार स्थिर और सात चर।पंचांग
- कर्कKarka (Karkaṭa)कर्क: चतुर्थ राशि, जल तत्व, चर स्वभाव, स्वामी चंद्रमा।ज्योतिष · होरा
- कर्मभावKarma bhāvaदशम भाव: कर्म, व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन।ज्योतिष · होरा
- कलत्रभावKalatra bhāva (Jāyā, Yuvati bhāva)सप्तम भाव: जीवनसाथी, साझेदारी, अनुबंध और सार्वजनिक व्यवहार।ज्योतिष · होरा
- कल्पKalpaकर्मकांड-विधि का वेदांग: श्रौत, गृह्य, धर्म और शुल्ब सूत्र।वेद
- कारकKārakaकारक: वह ग्रह जो किसी व्यक्ति या विषय का सूचक हो।ज्योतिष · होरा
- कालसर्पदोषKāla Sarpa doṣaसातों ग्रहों का राहु-केतु अक्ष के एक ही ओर होना।ज्योतिष · होरा
- कुम्भKumbhaकुंभ: एकादश राशि, वायु तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी शनि।ज्योतिष · होरा
- केतुKetuचंद्रमा का अवरोही पात, जो सदा राहु के सामने रहता है।ज्योतिष · होरा
- केन्द्रKendraकोणीय भाव 1, 4, 7 और 10; कुंडली के स्तंभ।ज्योतिष · होरा
- क्षयKṣayaक्षय: गणना में छूट जाने वाली तिथि या मास।पंचांग
ग
- गणकूटGaṇa kūṭaषष्ठ कूट (6 अंक): देव, मनुष्य और राक्षस स्वभाव।ज्योतिष · होरा
- गान्धर्ववेदGāndharvavedaसंगीत, नृत्य और प्रदर्शन-कला का उपवेद।वेद
- गुरुGuru (Bṛhaspati)गुरु: ज्ञान, शिक्षक, संतान, धर्म और विस्तार।ज्योतिष · होरा
- गोचरGocaraगोचर: जन्म-कुंडली पर ग्रहों की वर्तमान गति।ज्योतिष · होरा
- ग्रहमैत्रीकूटGraha maitrī kūṭaपंचम कूट (5 अंक): दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की मैत्री।ज्योतिष · होरा
च
छ
ज
त
- तनुभावTanu bhāvaप्रथम भाव: शरीर, स्वयं और व्यक्तित्व; लग्न का भाव।ज्योतिष · होरा
- ताराकूटTārā kūṭaतृतीय कूट (3 अंक): नौ के चक्रों में गिनी गई नक्षत्र-दूरी।ज्योतिष · होरा
- तिथिTithiचांद्र दिवस: सूर्य से चंद्रमा की प्रत्येक 12° की कोणीय दूरी।पंचांग
- तुलाTulāतुला: सप्तम राशि, वायु तत्व, चर स्वभाव, स्वामी शुक्र।ज्योतिष · होरा
- त्रिकोणTrikoṇaत्रिकोण भाव 1, 5 और 9; धर्म के भाव।ज्योतिष · होरा
द
- दर्शनDarśana (ṣaḍ-darśana)दर्शन-संप्रदाय; छह शास्त्रीय दर्शन।वेद
- दशाDaśāग्रह-अवधि: जीवन का वह कालखंड जिस पर एक ग्रह का अधिकार हो।ज्योतिष · होरा
- दशांशDaśāṃśaदशम विभाग कुंडली (D10), जो कर्म और व्यवसाय के लिए देखी जाती है।ज्योतिष · होरा
- दिनचर्याDinacaryāआयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित दैनिक आचरण-विधि।आयुर्वेद
- दुःस्थानDuḥsthānaकठिन भाव 6, 8 और 12, जिन्हें त्रिक भी कहते हैं।ज्योतिष · होरा
- दृष्टिDṛṣṭiदृष्टि: ग्रह द्वारा भावों और ग्रहों पर डाली गई ‘नज़र’।ज्योतिष · होरा
- दोषDoṣaदोष: ज्योतिष में पीड़ाकारी योग, आयुर्वेद में शरीर का मूल तत्व।ज्योतिष · होरा
ध
- धनभावDhana bhāvaद्वितीय भाव: धन, वाणी, कुटुंब और भोजन।ज्योतिष · होरा
- धनुDhanu (Dhanus)धनु: नवम राशि, अग्नि तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी गुरु।ज्योतिष · होरा
- धनुर्वेदDhanurvedaधनुर्विद्या और युद्धकला का उपवेद।वेद
- धर्मभावDharma bhāva (Bhāgya bhāva)नवम भाव: धर्म, पिता, गुरु, भाग्य और लंबी यात्राएँ।ज्योतिष · होरा
न
- नक्षत्रNakṣatraचांद्र नक्षत्र: 13°20′ के 27 विभागों में से एक।पंचांग
- नवांशNavāṃśaनवम विभाग कुंडली (D9), प्रत्येक राशि नौ भागों में।ज्योतिष · होरा
- नाडीकूटNāḍī kūṭaअष्टम कूट (8 अंक): नक्षत्रों की आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी।ज्योतिष · होरा
- निरयनNirayanaनिरयन राशिचक्र, जो तारों से स्थिर है; ज्योतिष का आधार।सिद्धांत
- निरुक्तNiruktaव्युत्पत्ति और वैदिक शब्दों की व्याख्या का वेदांग।वेद
- नीचNīcaनीच: उच्च के सामने की राशि, जहाँ गरिमा न्यूनतम होती है।ज्योतिष · होरा
प
- पक्षPakṣaचांद्र पखवाड़ा: बढ़ता शुक्ल या घटता कृष्ण, प्रत्येक में पंद्रह तिथियाँ।पंचांग
- पञ्चकPañcakaअंतिम पाँच नक्षत्रों, धनिष्ठा से रेवती, में चंद्रमा का गोचर।पंचांग
- पणफरPaṇapharaअनुगामी भाव 2, 5, 8 और 11, जो केंद्रों के बाद आते हैं।ज्योतिष · होरा
- पराशरParāśaraवे ऋषि जिन्हें बृहत् पराशर होरा शास्त्र का रचयिता माना जाता है।इतिहास
- परिवर्तनParivartanaपरस्पर विनिमय: दो ग्रहों का एक-दूसरे की राशि में होना।ज्योतिष · होरा
- पादPāda (Caraṇa)नक्षत्र का चौथाई भाग, 3°20′, जिसका अपना नामाक्षर होता है।पंचांग
- पितृदोषPitṛ doṣaसूर्य या नवम भाव की पीड़ा, जिसे पूर्वजों से जोड़ा जाता है।ज्योतिष · होरा
- पित्तPittaरूपांतरण का दोष, जो अग्नि और जल से बना है।आयुर्वेद
- पुत्रभावPutra bhāvaपंचम भाव: संतान, बुद्धि, विद्या और पूर्व पुण्य।ज्योतिष · होरा
- पूर्णिमाPūrṇimāपूर्णिमा: शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि।पंचांग
- प्रकृतिPrakṛtiप्रकृति: व्यक्ति में तीन दोषों का जन्मजात संतुलन।आयुर्वेद
- प्रत्यन्तर्दशाPratyantardaśāअंतर्दशा के भीतर तीसरे स्तर की अवधि।ज्योतिष · होरा
- प्रदोषPradoṣaत्रयोदशी की संध्या, जिसे शिव को समर्पित व्रत के रूप में मनाया जाता है।पंचांग
- प्राणायामPrāṇāyāmaश्वास का नियमन: पतंजलि के योग का चौथा अंग।योग
फ
ब
- बीजगणितBījagaṇitaबीजगणित: अज्ञात राशियों के साथ गणना, शाब्दिक अर्थ ‘बीज का गणित’।गणित
- बुधBudhaबुध: बुद्धि, वाणी, विद्या, व्यापार और गणना।ज्योतिष · होरा
- बृहज्जातकBṛhajjātakaजातक ज्योतिष पर वराहमिहिर का शास्त्रीय ग्रंथ।इतिहास
- ब्रह्मस्थानBrahmasthānaवास्तु ग्रिड का केंद्रीय क्षेत्र, जो ब्रह्मा को सौंपा गया है।वास्तु
- ब्राह्ममुहूर्तBrāhma muhūrtaभोर से पहले का मुहूर्त, सूर्योदय से लगभग 96 से 48 मिनट पूर्व।पंचांग
भ
- भकूटBhakūṭaसप्तम कूट (7 अंक): दोनों चंद्र राशियों की सापेक्ष स्थिति।ज्योतिष · होरा
- भद्राBhadrā (Viṣṭi karaṇa)विष्टि करण, जिसे पंचांग कार्यारंभ के लिए अनुपयुक्त बताते हैं।पंचांग
- भावचलितBhāva calitaपूर्ण राशियों के बजाय भाव-मध्यों से बनी भाव कुंडली।ज्योतिष · होरा
- भास्करBhāskaraदो खगोलशास्त्रियों का नाम; प्रायः भास्कर द्वितीय (जन्म 1114), सिद्धांतशिरोमणि के रचयिता।इतिहास
म
- मकरMakaraमकर: दशम राशि, पृथ्वी तत्व, चर स्वभाव, स्वामी शनि।ज्योतिष · होरा
- मङ्गलMaṅgala (Kuja, Bhauma)मंगल: ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि और संघर्ष।ज्योतिष · होरा
- मङ्गलदोषMaṅgala doṣa (Kuja doṣa)मंगल का 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना।ज्योतिष · होरा
- मासMāsaमास: चांद्र (अमांत या पूर्णिमांत) अथवा सौर।पंचांग
- मित्रMitraग्रहों के बीच मैत्री, नैसर्गिक और तात्कालिक।ज्योतिष · होरा
- मिथुनMithunaमिथुन: तृतीय राशि, वायु तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी बुध।ज्योतिष · होरा
- मीनMīnaमीन: द्वादश राशि, जल तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी गुरु।ज्योतिष · होरा
- मुहूर्तMuhūrta48 मिनट की समय-इकाई; शुभ समय चुनने की विद्या भी।पंचांग
- मूलत्रिकोणMūlatrikoṇaग्रह का मूल राशि-खंड, गरिमा में उच्च और स्वराशि के बीच।ज्योतिष · होरा
- मेषMeṣaमेष: प्रथम राशि, अग्नि तत्व, चर स्वभाव, स्वामी मंगल।ज्योतिष · होरा
य
- युतिYutiयुति: एक ही राशि में दो या अधिक ग्रहों का होना।ज्योतिष · होरा
- योगYoga (in a chart)कुंडली में ग्रहों, भावों और राशियों का परिभाषित संयोग।ज्योतिष · होरा
- योगYoga (of the pañcāṅga)सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों के योग से बना पंचांग का अंग।पंचांग
- योगिनी दशाYoginī daśāआठ योगिनियों का 36 वर्षीय दशा-चक्र।ज्योतिष · होरा
- योनिकूटYoni kūṭaचतुर्थ कूट (4 अंक): नक्षत्रों को दिए गए पशु-प्रतीक।ज्योतिष · होरा
र
ल
व
- वराहमिहिरVarāhamihiraउज्जैन के छठी शताब्दी के खगोलशास्त्री-ज्योतिषी, जिन्होंने तीनों शाखाओं में लिखा।इतिहास
- वर्गVargaविभागीय कुंडली: राशि के उपविभाजन से बनी व्युत्पन्न कुंडली।ज्योतिष · होरा
- वर्णकूटVarṇa kūṭaप्रथम कूट (1 अंक): चंद्र राशियों का चार वर्णों में वर्गीकरण।ज्योतिष · होरा
- वश्यकूटVaśya kūṭaद्वितीय कूट (2 अंक): चंद्र राशि-वर्गों के बीच पारस्परिक प्रभाव।ज्योतिष · होरा
- वातVātaगति का दोष, जो आकाश और वायु से बना है।आयुर्वेद
- वारVāraसप्ताह का दिन, जो ग्रह के नाम पर है और सूर्योदय से गिना जाता है।पंचांग
- वास्तुपुरुषVāstu puruṣaभूखंड पर लेटी हुई कल्पित आकृति, जो देवताओं के ग्रिड को दर्शाती है।वास्तु
- विंशोत्तरी दशाVimśottarī daśāनौ ग्रहों का 120 वर्षीय, नक्षत्र-आधारित दशा-चक्र।ज्योतिष · होरा
- विभक्तिVibhaktiकारक-विभक्ति: वाक्य में संज्ञा की भूमिका बताने वाला प्रत्यय।संस्कृत
- वृश्चिकVṛścikaवृश्चिक: अष्टम राशि, जल तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी मंगल।ज्योतिष · होरा
- वृषभVṛṣabhaवृषभ: द्वितीय राशि, पृथ्वी तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी शुक्र।ज्योतिष · होरा
- वेदाङ्गVedāṅgaवेद के अध्ययन और प्रयोग की छह सहायक विद्याएँ।वेद
- व्ययभावVyaya bhāvaद्वादश भाव: व्यय, हानि, दूर देश, एकांत और मोक्ष।ज्योतिष · होरा
- व्याकरणVyākaraṇaव्याकरण का वेदांग, जिसका शास्त्रीय रूप पाणिनि की अष्टाध्यायी है।वेद
श
- शत्रुŚatruग्रहों के बीच शत्रुता; शत्रु की राशि में स्थित ग्रह।ज्योतिष · होरा
- शनिŚaniशनि: काल, अनुशासन, श्रम, विलंब और आयु।ज्योतिष · होरा
- शिक्षाŚikṣāध्वनि-विज्ञान का वेदांग: उच्चारण, स्वर और पाठ।वेद
- शुक्रŚukraशुक्र: संबंध, कलाएँ, परिष्कार, सुख-सुविधा और वाहन।ज्योतिष · होरा
- शुल्बसूत्रŚulba Sūtraरस्सी से यज्ञ-वेदियाँ बनाने के वैदिक ज्यामिति ग्रंथ।गणित
- शून्यŚūnyaशून्य, संख्या के रूप में और दशमलव पद्धति में स्थान-धारक के रूप में।गणित
- श्लोकŚlokaपद्य, विशेषकर 32 अक्षरों वाला अनुष्टुभ् छंद।संस्कृत
ष
स
- संवत्Saṃvatयुग या वर्ष-गणना, जैसे विक्रम या शक संवत्।पंचांग
- संहितास्कन्धSaṃhitā skandhaज्योतिष की वह शाखा जो सामूहिक विषयों, शकुन और प्रकृति से संबंधित है।ज्योतिष · होरा
- सङ्क्रान्तिSaṅkrāntiनिरयन राशि में सूर्य का प्रवेश; वर्ष में बारह।पंचांग
- सन्धिSandhiशब्दों या शब्दांशों के मिलन पर ध्वनियों का संयोग।संस्कृत
- सहजभावSahaja bhāvaतृतीय भाव: भाई-बहन, साहस, पराक्रम और छोटी यात्राएँ।ज्योतिष · होरा
- साढ़ेसातीSāḍhe-sātīचंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का गोचर।ज्योतिष · होरा
- सायनSāyanaसायन राशिचक्र, जो गतिशील वसंत विषुव से मापा जाता है।सिद्धांत
- सारावलीSārāvalīकल्याणवर्मा का विस्तृत होरा संग्रह, जो वराहमिहिर के ग्रंथ का विस्तार है।इतिहास
- सिंहSiṃhaसिंह: पंचम राशि, अग्नि तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी सूर्य।ज्योतिष · होरा
- सिद्धान्तSiddhāntaगणितीय खगोलशास्त्र: ग्रहों, ग्रहणों और काल की गणना के ग्रंथ।सिद्धांत
- सुखभावSukha bhāvaचतुर्थ भाव: माता, गृह, भूमि, वाहन और आंतरिक सुख।ज्योतिष · होरा
- सूत्रSūtraसंक्षिप्त सूक्ति; शास्त्र-ग्रंथों का संक्षिप्त नियम-रूप।संस्कृत
- सूर्यSūryaसूर्य: आत्मा, जीवन-शक्ति, पिता और अधिकार।ज्योतिष · होरा
- सूर्यसिद्धान्तSūrya Siddhāntaशास्त्रीय खगोलशास्त्रीय ग्रंथ, जो अनेक पारंपरिक पंचांगों का आधार है।सिद्धांत
- स्थापत्यवेदSthāpatyavedaस्थापत्य और भवन-निर्माण का उपवेद, वास्तु का स्रोत।वास्तु
- स्वक्षेत्रSvakṣetra (Svarāśi)स्वराशि: ग्रह का अपनी स्वामित्व वाली राशि में होना।ज्योतिष · होरा
