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School of Vedic Sciences, FORE

ग्रंथ-संग्रह · गणित

Līlāvatī

लीलावती

रचयिता
भास्कर द्वितीय
काल
1150 ईस्वी
परंपरा
गणित

सार

सिद्धान्तशिरोमणि का अंकगणित भाग, जो शताब्दियों तक अपने आप में एक पाठ्य-पुस्तक के रूप में प्रचलित रहा। इसमें मूल क्रियाएँ, भिन्न, शून्य से जुड़े नियम, श्रेढ़ी, समतल ज्यामिति, क्षेत्रमिति और क्रमचय-संचय आते हैं, जो प्रायः लीलावती नामक बालिका को संबोधित प्रश्नों के रूप में रखे गए हैं। मुग़ल दरबार में इसका फ़ारसी में अनुवाद हुआ।

संरचना

लगभग 270 श्लोक (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न), विषय के क्रम में व्यवस्थित।

कहाँ पढ़ें

एच. टी. कोलब्रुक (H. T. Colebrooke) का अंग्रेज़ी अनुवाद (1817) और टिप्पणी सहित आधुनिक संस्करण; के. एस. पटवर्धन, एस. ए. नैमपल्ली और एस. एल. सिंह (K. S. Patwardhan, S. A. Naimpally, S. L. Singh) ने टिप्पणियों सहित अनुवाद प्रकाशित किया (2001)।