ग्रंथ-संग्रह · वास्तु
Mayamata
मयमत
- रचयिता
- मय को आरोपित
- काल
- मोटे तौर पर नौवीं–बारहवीं शती ईस्वी, दक्षिण भारत (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- वास्तु
सार
वास्तु और प्रतिमा-विधान पर दक्षिण भारत का ग्रंथ, जिसमें भूमि-चयन, मिट्टी-परीक्षा, शंकु द्वारा दिशा-निर्धारण, वर्गाकार भूमि-ग्रिड (वास्तुपुरुष मण्डल), ग्राम और नगर की योजनाएँ, मंदिर, गृह और प्रतिमाएँ आती हैं। यह उपलब्ध वास्तु-ग्रंथों में सबसे व्यवस्थित ग्रंथों में से एक है।
संरचना
पद्य में 36 अध्याय (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
ब्रूनो डागेंस (Bruno Dagens) का समीक्षित संस्करण और अंग्रेज़ी अनुवाद (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र)।
