ग्रंथ-संग्रह · संहिता
Muhūrtacintāmaṇi
मुहूर्तचिन्तामणि
- रचयिता
- राम दैवज्ञ
- काल
- 1600 ईस्वी
- परंपरा
- संहिता
सार
कार्यों के लिए समय-चयन का मानक ग्रंथ, नामकरण और उपनयन से लेकर गृह-निर्माण और यात्रा तक। इसमें तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण के गुण, तथा वे स्थितियाँ बताई गई हैं जो किसी क्षण को उपयुक्त या अनुपयुक्त बनाती हैं। गोविन्द की पीयूषधारा टीका प्रायः इसके साथ पढ़ी जाती है।
संरचना
पद्य में लगभग 11 प्रकरण (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न)।
कहाँ पढ़ें
पीयूषधारा टीका सहित संस्कृत-हिंदी संस्करण व्यापक रूप से उपलब्ध हैं।
