पंचांग · गोचर
गोचर 1981: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1981 में गुरु (बृहस्पति) 27 अक्टूबर को तुला में, राहु 24 दिसंबर को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 1981 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1980 से, 14 जनवरी 1981 तक
- चन्द्रतुला में30 दिसंबर 1980 से, 2 जनवरी 1981 तक
- मंगलमकर में22 दिसंबर 1980 से, 30 जनवरी 1981 तक
- बुधधनु में21 दिसंबर 1980 से, 9 जनवरी 1981 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में26 सितंबर 1980 से, 27 अक्टूबर 1981 तक
- शुक्रवृश्चिक में13 दिसंबर 1980 से, 6 जनवरी 1981 तक
- शनिकन्या में27 जुलाई 1980 से, 6 अक्टूबर 1982 तक
- राहुकर्क में6 जून 1980 से, 24 दिसंबर 1981 तक
- केतुमकर में6 जून 1980 से, 24 दिसंबर 1981 तक
1981 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1981
6 जनवरीसुबह 9:16
शुक्र का धनु में प्रवेश
9 जनवरीरात 1:00
बुध का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 1:55
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीदोपहर 3:31
मंगल अस्त (15 जून तक)†
18 जनवरीरात 9:57
शनि कन्या 16°12′ पर वक्री
22 जनवरीदोपहर 1:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीरात 12:35
गुरु (बृहस्पति) कन्या 16°48′ पर वक्री
27 जनवरीसुबह 4:57
बुध का कुम्भ में प्रवेश
30 जनवरीरात 1:50
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
30 जनवरीसुबह 8:41
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 1981
8 फ़रवरीशाम 6:00
बुध कुम्भ 11°20′ पर वक्री
11 फ़रवरीसुबह 8:37
बुध अस्त (23 फ़रवरी तक)†
12 फ़रवरीदोपहर 2:57
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
22 फ़रवरीदोपहर 12:04
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
23 फ़रवरीसुबह 8:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
23 फ़रवरीदोपहर 2:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीशाम 4:45
शुक्र अस्त (15 मई तक)†
मार्च 1981
2 मार्चदोपहर 12:36
बुध मकर 26°16′ पर मार्गी
9 मार्चरात 3:04
मंगल का मीन में प्रवेश
11 मार्चदोपहर 1:24
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 11:54
सूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्चसुबह 9:33
शुक्र का मीन में प्रवेश
अप्रैल 1981
4 अप्रैलशाम 5:10
बुध का मीन में प्रवेश
12 अप्रैलदोपहर 1:21
शुक्र का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलरात 8:29
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 6:59
बुध अस्त (10 मई तक)†
17 अप्रैलरात 12:49
मंगल का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलसुबह 8:02
बुध का मेष में प्रवेश
मई 1981
5 मईदोपहर 12:23
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 मईरात 8:20
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
10 मईसुबह 8:02
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईशाम 5:26
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईरात 8:48
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
22 मईरात 9:43
बुध का मिथुन में प्रवेश
27 मईदोपहर 1:04
मंगल का वृषभ में प्रवेश
28 मईरात 12:14
गुरु (बृहस्पति) कन्या 6°51′ पर मार्गी
31 मईसुबह 6:27
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 1981
5 जूनसुबह 8:14
शनि कन्या 9°24′ पर मार्गी
9 जूनशाम 5:04
बुध मिथुन 11°37′ पर वक्री
13 जूनरात 10:17
बुध अस्त (30 जून तक)†
15 जूनरात 12:07
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनशाम 6:27
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
24 जूनशाम 7:36
शुक्र का कर्क में प्रवेश
30 जूनशाम 7:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
जुलाई 1981
3 जुलाईशाम 6:28
बुध मिथुन 2°44′ पर मार्गी
9 जुलाईसुबह 4:24
मंगल का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 11:02
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईदोपहर 12:22
शुक्र का सिंह में प्रवेश
28 जुलाईसुबह 10:15
बुध अस्त (25 अगस्त तक)†
29 जुलाईशाम 6:43
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1981
13 अगस्तसुबह 10:33
शुक्र का कन्या में प्रवेश
13 अगस्तसुबह 11:44
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तशाम 7:26
सूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अगस्तसुबह 7:34
मंगल का कर्क में प्रवेश
25 अगस्तदोपहर 2:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अगस्तरात 2:39
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 1981
7 सितंबरशाम 5:17
शुक्र का तुला में प्रवेश
16 सितंबरशाम 7:19
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबररात 11:11
शनि अस्त (23 अक्टूबर तक)†
20 सितंबररात 9:49
बुध का तुला में प्रवेश
30 सितंबररात 3:34
गुरु (बृहस्पति) अस्त (28 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 1981
3 अक्टूबरदोपहर 2:13
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
6 अक्टूबरदोपहर 2:44
बुध तुला 10°16′ पर वक्री
10 अक्टूबरसुबह 11:46
मंगल का सिंह में प्रवेश
12 अक्टूबररात 10:22
बुध अस्त (24 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 7:11
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरशाम 6:49
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
23 अक्टूबरशाम 4:15
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
24 अक्टूबरशाम 6:23
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अक्टूबरदोपहर 1:33
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
27 अक्टूबरदोपहर 2:40
बुध कन्या 24°40′ पर मार्गी
28 अक्टूबरदोपहर 1:32
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
30 अक्टूबरशाम 4:08
शुक्र का धनु में प्रवेश
नवंबर 1981
4 नवंबररात 8:44
बुध का तुला में प्रवेश
15 नवंबररात 10:18
बुध अस्त (4 जनवरी तक)†
16 नवंबरसुबह 6:53
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
25 नवंबररात 1:05
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
30 नवंबरशाम 4:16
शुक्र का मकर में प्रवेश
दिसंबर 1981
3 दिसंबरसुबह 4:04
मंगल का कन्या में प्रवेश
14 दिसंबररात 2:38
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 9:29
सूर्य का धनु में प्रवेश
24 दिसंबरसुबह 10:40
राहु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
24 दिसंबरसुबह 10:40
केतु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
