पंचांग · गोचर
गोचर 1985: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1985 में गुरु (बृहस्पति) 10 जनवरी को मकर में, राहु 29 जनवरी को मेष में, शनि 1 जून को तुला में, शनि 17 सितंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 1985 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1984 से, 14 जनवरी 1985 तक
- चन्द्रमेष में31 दिसंबर 1984 से, 3 जनवरी 1985 तक
- मंगलकुम्भ में17 दिसंबर 1984 से, 25 जनवरी 1985 तक
- बुधवृश्चिक में14 दिसंबर 1984 से, 6 जनवरी 1985 तक
- गुरु (बृहस्पति)धनु में22 दिसंबर 1983 से, 10 जनवरी 1985 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 1984 से, 26 जनवरी 1985 तक
- शनिवृश्चिक में21 दिसंबर 1984 से, 1 जून 1985 तक
- राहुवृषभ में13 जुलाई 1983 से, 29 जनवरी 1985 तक
- केतुवृश्चिक में13 जुलाई 1983 से, 29 जनवरी 1985 तक
1985 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1985
1 जनवरीरात 3:41
गुरु (बृहस्पति) अस्त (29 जनवरी तक)†
6 जनवरीरात 8:04
बुध का धनु में प्रवेश
10 जनवरीदोपहर 2:33
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 2:42
सूर्य का मकर में प्रवेश
25 जनवरीदोपहर 12:54
मंगल का मीन में प्रवेश
26 जनवरीरात 10:04
शुक्र का मीन में प्रवेश
28 जनवरीसुबह 11:29
बुध का मकर में प्रवेश
29 जनवरीसुबह 4:39
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
29 जनवरीदोपहर 3:45
बुध अस्त (7 मार्च तक)†
29 जनवरीशाम 4:34
राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
29 जनवरीशाम 4:34
केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
फ़रवरी 1985
12 फ़रवरीदोपहर 3:38
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीशाम 4:17
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 1985
3 मार्चशाम 6:57
बुध का मीन में प्रवेश
6 मार्चशाम 5:44
मंगल का मेष में प्रवेश
7 मार्चशाम 4:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 मार्चशाम 5:35
शनि वृश्चिक 4°29′ पर वक्री
13 मार्चरात 11:46
शुक्र मीन 28°39′ पर वक्री
14 मार्चदोपहर 12:31
सूर्य का मीन में प्रवेश
25 मार्चरात 12:29
बुध मीन 25°01′ पर वक्री
27 मार्चसुबह 7:03
बुध अस्त (10 अप्रैल तक)†
30 मार्चरात 3:41
शुक्र अस्त (9 अप्रैल तक)†
अप्रैल 1985
9 अप्रैलरात 3:43
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
10 अप्रैलशाम 7:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 अप्रैलरात 9:04
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलसुबह 10:53
बुध मीन 13°05′ पर मार्गी
17 अप्रैलदोपहर 12:39
मंगल का वृषभ में प्रवेश
25 अप्रैलसुबह 5:40
शुक्र मीन 12°21′ पर मार्गी
मई 1985
9 मईशाम 7:35
बुध का मेष में प्रवेश
14 मईशाम 6:00
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
21 मईसुबह 7:30
मंगल अस्त (9 सितंबर तक)†
26 मईदोपहर 2:05
बुध अस्त (19 जून तक)†
27 मईरात 10:05
बुध का वृषभ में प्रवेश
30 मईसुबह 7:24
शुक्र का मेष में प्रवेश
31 मईसुबह 4:38
मंगल का मिथुन में प्रवेश
जून 1985
1 जूनरात 2:41
शनि का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
5 जूनरात 3:36
गुरु (बृहस्पति) मकर 23°19′ पर वक्री
10 जूनरात 10:58
बुध का मिथुन में प्रवेश
15 जूनरात 12:38
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जूनरात 11:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 जूनरात 3:52
बुध का कर्क में प्रवेश
30 जूनदोपहर 1:44
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 1985
15 जुलाईदोपहर 2:33
मंगल का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 11:30
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईशाम 7:42
बुध का सिंह में प्रवेश
26 जुलाईरात 1:37
शनि तुला 27°49′ पर मार्गी
28 जुलाईरात 12:25
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
28 जुलाईसुबह 6:21
बुध सिंह 1°40′ पर वक्री
अगस्त 1985
3 अगस्तदोपहर 1:02
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
4 अगस्तरात 12:57
बुध अस्त (18 अगस्त तक)†
16 अगस्तशाम 7:51
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तशाम 7:21
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 अगस्तसुबह 4:18
बुध कर्क 19°34′ पर मार्गी
23 अगस्तरात 12:06
शुक्र का कर्क में प्रवेश
31 अगस्तसुबह 7:13
मंगल का सिंह में प्रवेश
सितंबर 1985
3 सितंबररात 3:51
बुध का सिंह में प्रवेश
7 सितंबरसुबह 5:30
बुध अस्त (13 अक्टूबर तक)†
9 सितंबरसुबह 10:11
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
16 सितंबरशाम 7:45
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबररात 2:52
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 4:54
शनि का वृश्चिक में प्रवेश
19 सितंबरशाम 5:53
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 1985
3 अक्टूबरदोपहर 2:03
गुरु (बृहस्पति) मकर 13°28′ पर मार्गी
7 अक्टूबररात 12:25
बुध का तुला में प्रवेश
11 अक्टूबरदोपहर 3:25
शुक्र का कन्या में प्रवेश
13 अक्टूबरदोपहर 12:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 अक्टूबरसुबह 7:41
सूर्य का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरशाम 6:12
मंगल का कन्या में प्रवेश
27 अक्टूबररात 3:00
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 1985
4 नवंबरशाम 6:51
शुक्र का तुला में प्रवेश
6 नवंबरसुबह 10:19
शनि अस्त (10 दिसंबर तक)†
16 नवंबरसुबह 7:27
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबररात 9:39
बुध वृश्चिक 21°21′ पर वक्री
23 नवंबरशाम 4:04
बुध अस्त (4 दिसंबर तक)†
28 नवंबरशाम 5:20
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1985
4 दिसंबरशाम 4:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
4 दिसंबरशाम 6:31
मंगल का तुला में प्रवेश
8 दिसंबरशाम 4:53
बुध वृश्चिक 5°07′ पर मार्गी
9 दिसंबरसुबह 4:13
शुक्र अस्त (2 मार्च तक)†
10 दिसंबररात 1:21
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
15 दिसंबररात 10:05
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबरदोपहर 1:48
शुक्र का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
