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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1986: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1986 में गुरु (बृहस्पति) 25 जनवरी को कुम्भ में, राहु 18 अगस्त को मीन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1986 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1986 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1986

  • 1 जनवरीशाम 6:25

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 8 जनवरीदोपहर 3:32

    बुध अस्त (19 फ़रवरी तक)†

  • 14 जनवरीसुबह 8:48

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 10:02

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 21 जनवरीसुबह 8:48

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 22 जनवरीरात 8:14

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 जनवरीसुबह 6:50

    गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 1986

  • 4 फ़रवरीसुबह 9:43

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (5 मार्च तक)†

  • 7 फ़रवरीरात 10:50

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 8 फ़रवरीसुबह 7:17

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीरात 9:46

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 19 फ़रवरीसुबह 7:33

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 फ़रवरीसुबह 8:39

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 1986

  • 2 मार्चसुबह 7:03

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 मार्चसुबह 6:55

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 5 मार्चरात 12:23

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 मार्चशाम 4:25

    बुध मीन 7°39′ पर वक्री

  • 10 मार्चरात 12:27

    बुध अस्त (23 मार्च तक)†

  • 14 मार्चशाम 6:39

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 16 मार्चसुबह 5:18

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 19 मार्चसुबह 10:57

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 19 मार्चदोपहर 2:23

    शनि वृश्चिक 16°02′ पर वक्री

  • 23 मार्चदोपहर 12:25

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मार्चसुबह 10:37

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 30 मार्चदोपहर 2:12

    बुध कुम्भ 24°16′ पर मार्गी

अप्रैल 1986

  • 11 अप्रैलदोपहर 1:10

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलरात 3:09

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 21 अप्रैलरात 8:04

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

मई 1986

  • 4 मईरात 3:39

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 10 मईशाम 5:14

    बुध अस्त (4 जून तक)†

  • 15 मईरात 12:02

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 16 मईदोपहर 12:54

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 19 मईदोपहर 2:52

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 1986

  • 2 जूनदोपहर 1:52

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 4 जूनसुबह 9:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 जूनसुबह 4:50

    मंगल धनु 29°27′ पर वक्री

  • 10 जूनदोपहर 3:29

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 15 जूनसुबह 6:39

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनरात 9:57

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1986

  • 6 जुलाईसुबह 8:47

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 10 जुलाईरात 1:56

    बुध कर्क 12°46′ पर वक्री

  • 12 जुलाईरात 10:13

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 29°11′ पर वक्री

  • 16 जुलाईरात 1:45

    बुध अस्त (31 जुलाई तक)†

  • 16 जुलाईशाम 5:32

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 31 जुलाईशाम 6:49

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अगस्त 1986

  • 2 अगस्तसुबह 4:35

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 3 अगस्तसुबह 6:18

    बुध कर्क 2°04′ पर मार्गी

  • 7 अगस्तसुबह 10:53

    शनि वृश्चिक 9°24′ पर मार्गी

  • 12 अगस्तदोपहर 1:19

    मंगल धनु 17°45′ पर मार्गी

  • 17 अगस्तरात 1:56

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 18 अगस्तशाम 7:31

    राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 18 अगस्तशाम 7:31

    केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 22 अगस्तसुबह 11:49

    बुध अस्त (23 सितंबर तक)†

  • 27 अगस्तरात 3:39

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 31 अगस्तदोपहर 3:22

    शुक्र का तुला में प्रवेश

सितंबर 1986

  • 11 सितंबरशाम 6:23

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 1:52

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 23 सितंबररात 10:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 सितंबररात 10:22

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 29 सितंबररात 10:36

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 1986

  • 15 अक्टूबररात 10:01

    शुक्र तुला 26°44′ पर वक्री

  • 17 अक्टूबरदोपहर 1:49

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरसुबह 8:21

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरदोपहर 3:03

    शुक्र अस्त (10 नवंबर तक)†

नवंबर 1986

  • 2 नवंबरदोपहर 12:17

    बुध वृश्चिक 5°29′ पर वक्री

  • 7 नवंबररात 9:18

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 8 नवंबरदोपहर 3:13

    गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 19°18′ पर मार्गी

  • 10 नवंबरदोपहर 3:58

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 नवंबररात 11:30

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 नवंबरदोपहर 1:38

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 8:41

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 18 नवंबररात 2:48

    शनि अस्त (21 दिसंबर तक)†

  • 19 नवंबररात 2:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 नवंबरदोपहर 2:32

    बुध तुला 19°25′ पर मार्गी

  • 26 नवंबरसुबह 8:17

    शुक्र तुला 11°13′ पर मार्गी

दिसंबर 1986

  • 5 दिसंबरदोपहर 2:32

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 4:16

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबरसुबह 8:53

    बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†

  • 21 दिसंबरदोपहर 1:57

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 दिसंबररात 2:33

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 30 दिसंबरशाम 4:26

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 31 दिसंबरशाम 6:14

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और