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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर · बुध

1986 में बुध का गोचर

1986 में बुध 17 बार राशि बदलता है: 1 जनवरी को धनु, 21 जनवरी को मकर, 7 फ़रवरी को कुम्भ, 25 फ़रवरी को मीन …। वक्री: 7 मार्च, 10 जुलाई, 2 नवंबर से।

1986 में बुध किन राशियों में है

  1. वृश्चिक27 अक्टूबर, रात 3:00 1985 → 1 जनवरी, शाम 6:25 1986· लगभग 2 महीने
  2. धनु1 जनवरी, शाम 6:25 1986 → 21 जनवरी, सुबह 8:48 1986· 20 दिन
  3. मकर21 जनवरी, सुबह 8:48 1986 → 7 फ़रवरी, रात 10:50 1986· 18 दिन
  4. कुम्भ7 फ़रवरी, रात 10:50 1986 → 25 फ़रवरी, सुबह 8:39 1986· 17 दिन
  5. मीन25 फ़रवरी, सुबह 8:39 1986 → 19 मार्च, सुबह 10:57 1986· 22 दिन
  6. कुम्भ(वक्री गति से प्रवेश)19 मार्च, सुबह 10:57 1986 → 11 अप्रैल, दोपहर 1:10 1986· 23 दिन
  7. मीन11 अप्रैल, दोपहर 1:10 1986 → 4 मई, रात 3:39 1986· 23 दिन
  8. मेष4 मई, रात 3:39 1986 → 19 मई, दोपहर 2:52 1986· 15 दिन
  9. वृषभ19 मई, दोपहर 2:52 1986 → 2 जून, दोपहर 1:52 1986· 14 दिन
  10. मिथुन2 जून, दोपहर 1:52 1986 → 20 जून, रात 9:57 1986· 18 दिन
  11. कर्क20 जून, रात 9:57 1986 → 27 अगस्त, रात 3:39 1986· लगभग 2 महीने
  12. सिंह27 अगस्त, रात 3:39 1986 → 11 सितंबर, शाम 6:23 1986· 16 दिन
  13. कन्या11 सितंबर, शाम 6:23 1986 → 29 सितंबर, रात 10:36 1986· 18 दिन
  14. तुला29 सितंबर, रात 10:36 1986 → 23 अक्टूबर, सुबह 8:21 1986· 23 दिन
  15. वृश्चिक23 अक्टूबर, सुबह 8:21 1986 → 10 नवंबर, रात 11:30 1986· 19 दिन
  16. तुला(वक्री गति से प्रवेश)10 नवंबर, रात 11:30 1986 → 5 दिसंबर, दोपहर 2:32 1986· 25 दिन
  17. वृश्चिक5 दिसंबर, दोपहर 2:32 1986 → 26 दिसंबर, रात 2:33 1986· 21 दिन
  18. धनु26 दिसंबर, रात 2:33 1986 → 13 जनवरी, रात 11:33 1987· 19 दिन

तारीखवार

समय भारतीय मानक समय (IST) में।

जनवरी 1986

  • 1 जनवरीशाम 6:25

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 8 जनवरीदोपहर 3:32

    बुध अस्त (19 फ़रवरी तक)†

  • 21 जनवरीसुबह 8:48

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1986

  • 7 फ़रवरीरात 10:50

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 19 फ़रवरीसुबह 7:33

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 फ़रवरीसुबह 8:39

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 1986

  • 7 मार्चशाम 4:25

    बुध मीन 7°39′ पर वक्री

  • 10 मार्चरात 12:27

    बुध अस्त (23 मार्च तक)†

  • 19 मार्चसुबह 10:57

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 मार्चदोपहर 12:25

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 मार्चदोपहर 2:12

    बुध कुम्भ 24°16′ पर मार्गी

अप्रैल 1986

  • 11 अप्रैलदोपहर 1:10

    बुध का मीन में प्रवेश

मई 1986

  • 4 मईरात 3:39

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 10 मईशाम 5:14

    बुध अस्त (4 जून तक)†

  • 19 मईदोपहर 2:52

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 1986

  • 2 जूनदोपहर 1:52

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 4 जूनसुबह 9:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 जूनरात 9:57

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1986

  • 10 जुलाईरात 1:56

    बुध कर्क 12°46′ पर वक्री

  • 16 जुलाईरात 1:45

    बुध अस्त (31 जुलाई तक)†

  • 31 जुलाईशाम 6:49

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अगस्त 1986

  • 3 अगस्तसुबह 6:18

    बुध कर्क 2°04′ पर मार्गी

  • 22 अगस्तसुबह 11:49

    बुध अस्त (23 सितंबर तक)†

  • 27 अगस्तरात 3:39

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 1986

  • 11 सितंबरशाम 6:23

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 23 सितंबररात 10:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 सितंबररात 10:36

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 1986

  • 23 अक्टूबरसुबह 8:21

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 1986

  • 2 नवंबरदोपहर 12:17

    बुध वृश्चिक 5°29′ पर वक्री

  • 7 नवंबररात 9:18

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 10 नवंबररात 11:30

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 19 नवंबररात 2:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 नवंबरदोपहर 2:32

    बुध तुला 19°25′ पर मार्गी

दिसंबर 1986

  • 5 दिसंबरदोपहर 2:32

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 दिसंबरसुबह 8:53

    बुध अस्त (2 फ़रवरी तक)†

  • 26 दिसंबररात 2:33

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। यहाँ बुध को सूर्य से 14° (वक्री में 12°) के भीतर अस्त माना गया है (सूर्य सिद्धान्त); कुछ पंचांग अन्य सीमा या दृश्यता का नियम लेते हैं।

यह भी देखें: बुध (शब्दकोश) · गोचर 1986: सभी ग्रह · अपनी कुंडली पर गोचर

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और