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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2035: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2035 में गुरु (बृहस्पति) 6 अप्रैल को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में।

1 जनवरी 2035 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2035 का गोचर कैलेंडर

सभी समय पोखरा के स्थानीय समय (Asia/Kathmandu, UTC+5:45) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2035

  • 2 जनवरीरात 1:07

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 3 जनवरीरात 3:50

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 जनवरीरात 10:38

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीदोपहर 12:29

    बुध मकर 18°35′ पर वक्री

  • 20 जनवरीदोपहर 1:07

    बुध अस्त (1 फ़रवरी तक)†

  • 29 जनवरीदोपहर 1:44

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2035

  • 1 फ़रवरीरात 12:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 फ़रवरीसुबह 7:10

    बुध मकर 2°41′ पर मार्गी

  • 13 फ़रवरीसुबह 11:36

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीशाम 5:55

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीसुबह 7:46

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 2035

  • 7 मार्चशाम 6:25

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 मार्चसुबह 8:26

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 21 मार्चसुबह 10:02

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 21 मार्चशाम 5:31

    बुध अस्त (19 अप्रैल तक)†

  • 26 मार्चरात 12:16

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 30 मार्चशाम 7:27

    शनि कर्क 4°05′ पर मार्गी

अप्रैल 2035

  • 2 अप्रैलदोपहर 1:25

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (2 मई तक)†

  • 4 अप्रैलसुबह 8:43

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 6 अप्रैलदोपहर 12:00

    गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश

  • 10 अप्रैलरात 3:03

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलशाम 4:50

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 15 अप्रैलसुबह 5:42

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 19 अप्रैलसुबह 4:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 अप्रैलरात 12:38

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2035

  • 2 मईसुबह 8:24

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 मईरात 10:38

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 14 मईरात 12:24

    बुध वृषभ 13°38′ पर वक्री

  • 15 मईदोपहर 1:37

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 16 मईरात 10:14

    बुध अस्त (2 जून तक)†

  • 21 मईदोपहर 3:53

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

जून 2035

  • 2 जूनशाम 7:36

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 3 जूनदोपहर 2:07

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 6 जूनरात 8:38

    बुध वृषभ 4°58′ पर मार्गी

  • 15 जूनरात 8:11

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 28 जूनरात 3:50

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2035

  • 3 जुलाईशाम 7:58

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 4 जुलाईदोपहर 3:14

    शुक्र अस्त (15 सितंबर तक)†

  • 7 जुलाईसुबह 10:05

    बुध अस्त (2 अगस्त तक)†

  • 14 जुलाईसुबह 10:21

    शनि अस्त (19 अगस्त तक)†

  • 17 जुलाईसुबह 7:04

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईशाम 4:10

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 21 जुलाईसुबह 10:19

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 22 जुलाईदोपहर 2:50

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2035

  • 2 अगस्तसुबह 6:33

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 2 अगस्तशाम 4:21

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 15 अगस्तदोपहर 3:42

    मंगल मीन 4°05′ पर वक्री

  • 15 अगस्तरात 10:39

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तदोपहर 3:32

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तदोपहर 2:59

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 अगस्तरात 1:50

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2035

  • 9 सितंबररात 3:54

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 9 सितंबरशाम 7:42

    गुरु (बृहस्पति) मेष 26°22′ पर वक्री

  • 10 सितंबरसुबह 11:11

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 सितंबरसुबह 8:12

    बुध कन्या 17°16′ पर वक्री

  • 15 सितंबरदोपहर 3:49

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 17 सितंबरदोपहर 3:34

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबरसुबह 7:13

    बुध अस्त (2 अक्टूबर तक)†

अक्टूबर 2035

  • 2 अक्टूबररात 10:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 3 अक्टूबरसुबह 7:51

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 5 अक्टूबरसुबह 10:38

    बुध कन्या 2°26′ पर मार्गी

  • 15 अक्टूबरदोपहर 2:21

    मंगल कुम्भ 23°24′ पर मार्गी

  • 18 अक्टूबररात 3:36

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 21 अक्टूबरशाम 7:39

    बुध अस्त (8 दिसंबर तक)†

  • 27 अक्टूबरसुबह 11:40

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 अक्टूबररात 1:14

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 2035

  • 15 नवंबरसुबह 8:46

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 3:28

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 नवंबररात 3:05

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 20 नवंबरशाम 4:11

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 30 नवंबरशाम 4:22

    शनि कर्क 24°53′ पर वक्री

दिसंबर 2035

  • 4 दिसंबरशाम 4:11

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 8 दिसंबररात 1:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 दिसंबररात 10:40

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबरशाम 6:08

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 26 दिसंबरशाम 7:14

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और