धनभाव
Dhana bhāva
बोलचाल की हिन्दी: धन भाव (द्वितीय भाव)
द्वितीय भाव: धन, वाणी, कुटुंब और भोजन।
परिभाषा
द्वितीय भाव ‘धन’ कहलाता है; इसे कुटुंब और वाक् भाव भी कहते हैं। बृहत् पराशर होरा शास्त्र इसके कारकत्वों में संचित संसाधन, वाणी, मुख, परिवार और भोजन गिनाता है। गुरु इसका नैसर्गिक कारक है और यह पणफर भावों में आता है।
