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शब्दकोश: ज्योतिष · होरा
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81 शब्द
अ
- अन्तर्दशाAntardaśā (Bhukti)महादशा के भीतर की उप-अवधि, जिसे भुक्ति भी कहते हैं।ज्योतिष · होरा
- अरिभावAri bhāva (Ripu, Śatru bhāva)षष्ठ भाव: शत्रु, ऋण, रोग, सेवा और दैनिक कार्य।ज्योतिष · होरा
- अष्टकवर्गAṣṭakavargaआठ स्रोतों से प्रत्येक राशि को अंक देने वाली पद्धति।ज्योतिष · होरा
- अष्टकूटAṣṭakūṭaदो जन्म-कुंडलियों की तुलना की आठ-कूट, 36-अंक पद्धति।ज्योतिष · होरा
आ
उ
क
- कन्याKanyāकन्या: षष्ठ राशि, पृथ्वी तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी बुध।ज्योतिष · होरा
- कर्कKarka (Karkaṭa)कर्क: चतुर्थ राशि, जल तत्व, चर स्वभाव, स्वामी चंद्रमा।ज्योतिष · होरा
- कर्मभावKarma bhāvaदशम भाव: कर्म, व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन।ज्योतिष · होरा
- कलत्रभावKalatra bhāva (Jāyā, Yuvati bhāva)सप्तम भाव: जीवनसाथी, साझेदारी, अनुबंध और सार्वजनिक व्यवहार।ज्योतिष · होरा
- कारकKārakaकारक: वह ग्रह जो किसी व्यक्ति या विषय का सूचक हो।ज्योतिष · होरा
- कालसर्पदोषKāla Sarpa doṣaसातों ग्रहों का राहु-केतु अक्ष के एक ही ओर होना।ज्योतिष · होरा
- कुम्भKumbhaकुंभ: एकादश राशि, वायु तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी शनि।ज्योतिष · होरा
- केतुKetuचंद्रमा का अवरोही पात, जो सदा राहु के सामने रहता है।ज्योतिष · होरा
- केन्द्रKendraकोणीय भाव 1, 4, 7 और 10; कुंडली के स्तंभ।ज्योतिष · होरा
ग
- गणकूटGaṇa kūṭaषष्ठ कूट (6 अंक): देव, मनुष्य और राक्षस स्वभाव।ज्योतिष · होरा
- गुरुGuru (Bṛhaspati)गुरु: ज्ञान, शिक्षक, संतान, धर्म और विस्तार।ज्योतिष · होरा
- गोचरGocaraगोचर: जन्म-कुंडली पर ग्रहों की वर्तमान गति।ज्योतिष · होरा
- ग्रहमैत्रीकूटGraha maitrī kūṭaपंचम कूट (5 अंक): दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की मैत्री।ज्योतिष · होरा
च
त
- तनुभावTanu bhāvaप्रथम भाव: शरीर, स्वयं और व्यक्तित्व; लग्न का भाव।ज्योतिष · होरा
- ताराकूटTārā kūṭaतृतीय कूट (3 अंक): नौ के चक्रों में गिनी गई नक्षत्र-दूरी।ज्योतिष · होरा
- तुलाTulāतुला: सप्तम राशि, वायु तत्व, चर स्वभाव, स्वामी शुक्र।ज्योतिष · होरा
- त्रिकोणTrikoṇaत्रिकोण भाव 1, 5 और 9; धर्म के भाव।ज्योतिष · होरा
द
- दशाDaśāग्रह-अवधि: जीवन का वह कालखंड जिस पर एक ग्रह का अधिकार हो।ज्योतिष · होरा
- दशांशDaśāṃśaदशम विभाग कुंडली (D10), जो कर्म और व्यवसाय के लिए देखी जाती है।ज्योतिष · होरा
- दुःस्थानDuḥsthānaकठिन भाव 6, 8 और 12, जिन्हें त्रिक भी कहते हैं।ज्योतिष · होरा
- दृष्टिDṛṣṭiदृष्टि: ग्रह द्वारा भावों और ग्रहों पर डाली गई ‘नज़र’।ज्योतिष · होरा
- दोषDoṣaदोष: ज्योतिष में पीड़ाकारी योग, आयुर्वेद में शरीर का मूल तत्व।ज्योतिष · होरा
ध
न
प
- पणफरPaṇapharaअनुगामी भाव 2, 5, 8 और 11, जो केंद्रों के बाद आते हैं।ज्योतिष · होरा
- परिवर्तनParivartanaपरस्पर विनिमय: दो ग्रहों का एक-दूसरे की राशि में होना।ज्योतिष · होरा
- पितृदोषPitṛ doṣaसूर्य या नवम भाव की पीड़ा, जिसे पूर्वजों से जोड़ा जाता है।ज्योतिष · होरा
- पुत्रभावPutra bhāvaपंचम भाव: संतान, बुद्धि, विद्या और पूर्व पुण्य।ज्योतिष · होरा
- प्रत्यन्तर्दशाPratyantardaśāअंतर्दशा के भीतर तीसरे स्तर की अवधि।ज्योतिष · होरा
ब
भ
म
- मकरMakaraमकर: दशम राशि, पृथ्वी तत्व, चर स्वभाव, स्वामी शनि।ज्योतिष · होरा
- मङ्गलMaṅgala (Kuja, Bhauma)मंगल: ऊर्जा, साहस, भाई-बहन, भूमि और संघर्ष।ज्योतिष · होरा
- मङ्गलदोषMaṅgala doṣa (Kuja doṣa)मंगल का 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना।ज्योतिष · होरा
- मित्रMitraग्रहों के बीच मैत्री, नैसर्गिक और तात्कालिक।ज्योतिष · होरा
- मिथुनMithunaमिथुन: तृतीय राशि, वायु तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी बुध।ज्योतिष · होरा
- मीनMīnaमीन: द्वादश राशि, जल तत्व, द्विस्वभाव, स्वामी गुरु।ज्योतिष · होरा
- मूलत्रिकोणMūlatrikoṇaग्रह का मूल राशि-खंड, गरिमा में उच्च और स्वराशि के बीच।ज्योतिष · होरा
- मेषMeṣaमेष: प्रथम राशि, अग्नि तत्व, चर स्वभाव, स्वामी मंगल।ज्योतिष · होरा
य
- युतिYutiयुति: एक ही राशि में दो या अधिक ग्रहों का होना।ज्योतिष · होरा
- योगYoga (in a chart)कुंडली में ग्रहों, भावों और राशियों का परिभाषित संयोग।ज्योतिष · होरा
- योगिनी दशाYoginī daśāआठ योगिनियों का 36 वर्षीय दशा-चक्र।ज्योतिष · होरा
- योनिकूटYoni kūṭaचतुर्थ कूट (4 अंक): नक्षत्रों को दिए गए पशु-प्रतीक।ज्योतिष · होरा
र
ल
व
- वर्गVargaविभागीय कुंडली: राशि के उपविभाजन से बनी व्युत्पन्न कुंडली।ज्योतिष · होरा
- वर्णकूटVarṇa kūṭaप्रथम कूट (1 अंक): चंद्र राशियों का चार वर्णों में वर्गीकरण।ज्योतिष · होरा
- वश्यकूटVaśya kūṭaद्वितीय कूट (2 अंक): चंद्र राशि-वर्गों के बीच पारस्परिक प्रभाव।ज्योतिष · होरा
- विंशोत्तरी दशाVimśottarī daśāनौ ग्रहों का 120 वर्षीय, नक्षत्र-आधारित दशा-चक्र।ज्योतिष · होरा
- वृश्चिकVṛścikaवृश्चिक: अष्टम राशि, जल तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी मंगल।ज्योतिष · होरा
- वृषभVṛṣabhaवृषभ: द्वितीय राशि, पृथ्वी तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी शुक्र।ज्योतिष · होरा
- व्ययभावVyaya bhāvaद्वादश भाव: व्यय, हानि, दूर देश, एकांत और मोक्ष।ज्योतिष · होरा
श
ष
स
- संहितास्कन्धSaṃhitā skandhaज्योतिष की वह शाखा जो सामूहिक विषयों, शकुन और प्रकृति से संबंधित है।ज्योतिष · होरा
- सहजभावSahaja bhāvaतृतीय भाव: भाई-बहन, साहस, पराक्रम और छोटी यात्राएँ।ज्योतिष · होरा
- साढ़ेसातीSāḍhe-sātīचंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का गोचर।ज्योतिष · होरा
- सिंहSiṃhaसिंह: पंचम राशि, अग्नि तत्व, स्थिर स्वभाव, स्वामी सूर्य।ज्योतिष · होरा
- सुखभावSukha bhāvaचतुर्थ भाव: माता, गृह, भूमि, वाहन और आंतरिक सुख।ज्योतिष · होरा
- सूर्यSūryaसूर्य: आत्मा, जीवन-शक्ति, पिता और अधिकार।ज्योतिष · होरा
- स्वक्षेत्रSvakṣetra (Svarāśi)स्वराशि: ग्रह का अपनी स्वामित्व वाली राशि में होना।ज्योतिष · होरा
