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School of Vedic Sciences, FORE
सिद्धांत

निरयन

Nirayana

निरयन राशिचक्र, जो तारों से स्थिर है; ज्योतिष का आधार।

परिभाषा

निरयन (‘अयन रहित’) गणना भोगांश को तारों के बीच एक स्थिर बिंदु से मापती है, जिससे राशियाँ और नक्षत्र उन तारा-समूहों से संरेखित रहते हैं जिनके नाम पर वे हैं। ज्योतिष कुंडली, नक्षत्र और संक्रांति के लिए निरयन राशिचक्र का प्रयोग करता है, जो सायन स्थितियों से अयनांश घटाकर प्राप्त होता है। संदर्भ-तारे का चयन, जैसे लाहिड़ी पद्धति में चित्रा (स्पाइका) को 180° पर रखना, तय करता है कि कौन-सा अयनांश प्रयुक्त होगा।

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