ग्रंथ-संग्रह · आयुर्वेद
Aṣṭāṅgahṛdaya
अष्टाङ्गहृदय
- रचयिता
- वाग्भट
- काल
- लगभग सातवीं शती ईस्वी (काल-निर्धारण विवादित)
- परंपरा
- आयुर्वेद
सार
पूर्ववर्ती चिकित्सा-संहिताओं का पद्यबद्ध समन्वय, जो आयुर्वेद के आठ अंगों के आधार पर व्यवस्थित है। अपनी स्पष्टता के कारण यह कई क्षेत्रों में, विशेषकर केरल में, सबसे अधिक पढ़ाया जाने वाला आयुर्वेद-ग्रंथ बना, और इसका तिब्बती में अनुवाद हुआ। हम इसे एक ऐतिहासिक ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत करते हैं, स्वास्थ्य-मार्गदर्शन के रूप में नहीं।
संरचना
छह खंड, 120 अध्याय।
कहाँ पढ़ें
के. आर. श्रीकण्ठ मूर्ति (K. R. Srikantha Murthy) का अंग्रेज़ी अनुवाद (तीन खंड)।
