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ग्रंथ-संग्रह · सिद्धांत

Siddhāntaśiromaṇi

सिद्धान्तशिरोमणि

रचयिता
भास्कर द्वितीय (भास्कराचार्य)
काल
1150 ईस्वी
परंपरा
सिद्धांत

सार

भास्कर का व्यापक ग्रंथ, चार भागों में: लीलावती (अंकगणित), बीजगणित, ग्रहगणित (ग्रहों का गणित) और गोलाध्याय (गोल)। भास्कर ने स्वयं वासनाभाष्य नामक टीका लिखी, जिसमें तर्क समझाया गया है। परवर्ती शताब्दियों में यह सबसे अधिक पढ़े जाने वाले खगोल-ग्रंथों में से एक था।

संरचना

पद्य में चार भाग, लेखक की अपनी गद्य-टीका सहित।

कहाँ पढ़ें

वासनाभाष्य सहित संस्कृत संस्करण; गोलाध्याय का एल. विल्किन्सन (L. Wilkinson) द्वारा किया गया अंग्रेज़ी अनुवाद, जिसे बापूदेव शास्त्री (Bapu Deva Sastri) ने संशोधित किया।

Siddhāntaśiromaṇi (सिद्धान्तशिरोमणि) · ग्रंथ-संग्रह · School of Vedic Sciences, FORE