चौघड़िया: आठ भागों में दिन
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में कैसे बाँटता है, क्रम वहीं से क्यों आरंभ होता है, और मुहूर्त के लिए इसका प्रयोग कहाँ होता है।
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चार घड़ियाँ
चौघड़िया "चौ" (चार) और "घड़ी" (चौबीस मिनट की घटिका) से बना है। चार घड़ियाँ छियानवे मिनट होती हैं, बारह घंटे के दिन का आठवाँ भाग। नाम ही पद्धति बताता है: सूर्योदय से सूर्यास्त तक का दिन आठ बराबर भागों में, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात आठ और भागों में बँटती है। हर भाग को सात में से एक नाम मिलता है।
राहुकाल की तरह ये भाग वास्तविक दिन और रात के अंश हैं, घड़ी के घंटे नहीं। मध्य अक्टूबर में नई दिल्ली में दिन का एक चौघड़िया लगभग पचासी मिनट का और रात का लगभग पंचानबे मिनट का होता है; जून में दिन के भाग लगभग पौने दो घंटे तक लंबे हो जाते हैं और रात के छोटे।
सात नाम, सात ग्रह
हर नाम सात वार-ग्रहों में से एक से जुड़ा है, और उसका पारंपरिक गुण ग्रहों के नैसर्गिक शुभ और पाप विभाजन से आता है:
| नाम | अर्थ | ग्रह | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृत | अमृत | चन्द्र | शुभ |
| शुभ | मंगलकारी | गुरु | शुभ |
| लाभ | लाभ | बुध | शुभ |
| चर (चल) | चलायमान | शुक्र | सामान्य, यात्रा के लिए अच्छा |
| उद्वेग | व्याकुलता | सूर्य | त्याज्य |
| रोग | पीड़ा | मंगल | त्याज्य |
| काल | हानि | शनि | त्याज्य |
होरा-ग्रंथों में चन्द्र, गुरु, बुध और शुक्र नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं और सूर्य, मंगल, शनि नैसर्गिक पाप ग्रह। चौघड़िया यही वर्गीकरण दिन पर लागू करता है, शुक्र के चर को सामान्य मानकर।
क्रम वहीं से क्यों आरंभ होता है
दिन का पहला चौघड़िया उस वार (वार) के स्वामी का होता है: रविवार को उद्वेग (सूर्य), सोमवार को अमृत (चन्द्र), मंगलवार को रोग (मंगल), इत्यादि। वहाँ से नाम एक निश्चित क्रम में चलते हैं, वही क्रम जो होरा (ग्रह-घंटों) का है: सूर्य, शुक्र, बुध, चन्द्र, शनि, गुरु, मंगल, और फिर से। यह ग्रहों का घटती परिक्रमा-अवधि वाला क्रम (शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध, चन्द्र) है, जिसमें सूर्य से प्रवेश किया गया है। आठ भाग और सात नाम हैं, इसलिए दिन का आठवाँ भाग पहले को दोहराता है।
रात का क्रम अलग है। रात का पहला चौघड़िया उस दिन से गिने गए पाँचवें वार के स्वामी का होता है, उस दिन को पहला मानकर। इसलिए रविवार की रात शुभ (गुरु का नाम) से आरंभ होती है, क्योंकि रविवार से पाँचवाँ दिन गुरुवार है। फिर रात के नाम सातों में एक अलग निश्चित क्रम से चलते हैं, और आठवाँ फिर पहले को दोहराता है।
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: दिन में काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल; रात में लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत, चर, रोग, काल, लाभ। दिन शनि के नाम काल से खुलता है; रात बुध के नाम लाभ से, क्योंकि शनिवार से पाँचवाँ दिन बुधवार है।
चौघड़िया और होरा
दोनों पद्धतियाँ सूर्योदय पर वारेश से दिन खोलती हैं और ग्रहों का एक ही क्रम प्रयोग करती हैं। अंतर भाग के आकार का है: होरा पूरे दिन-रात का चौबीसवाँ भाग है, चौघड़िया दिन या रात का आठवाँ। वारों के नाम भी इसी गणित से आते हैं: दिन के चौबीस होरा उसी क्रम में ग्रहों को दें, तो अगले दिन का पहला होरा उस ग्रह को मिलता है जिसका वार अगला है। वार और होरा की यह योजना ईसा की आरंभिक शतियों के संस्कृत ग्रंथों में मिलती है, और डेविड पिंग्री जैसे विद्वानों ने इसका संबंध यूनानी ज्योतिष से जोड़ा है†।
इसका प्रयोग कहाँ होता है
चौघड़िया का प्रयोग मुख्यतः गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में, और इन क्षेत्रों के व्यापारी समुदायों में, व्यापार, यात्रा और सामान्य कार्यों के लिए होता है। गुजराती कैलेंडर इसे हर दिन के लिए छापते हैं, और दीपावली पर नए बही-खाते खोलने के लिए दुकानें लाभ या अमृत चौघड़िया की प्रतीक्षा कर सकती हैं। दक्षिण में इसका प्रयोग कम है, जहाँ यही दैनिक भूमिका राहुकाल निभाता है।
इसका ग्रंथ-इतिहास कम है। इस रूप में यह पद्धति रामदैवज्ञ के मुहूर्त चिन्तामणि या अन्य शास्त्रीय मुहूर्त-ग्रंथों में नहीं मिलती, और हमें इसका कोई निश्चित तिथि वाला आरंभिक स्रोत नहीं मिला है†। राहुकाल की तरह यह एक क्षेत्रीय, व्यावहारिक परिपाटी लगती है, जो मुहूर्त, यानी उपयुक्त समय, के शास्त्रीय विचार को ऐसे नियम में समेटती है जिसे कोई भी लागू कर सके।
जब पद्धतियाँ असहमत हों
एक ही क्षण एक पद्धति में शुभ और दूसरी में त्याज्य हो सकता है: अमृत चौघड़िया राहुकाल से टकरा सकता है, या लाभ चौघड़िया विष्टि करण में पड़ सकता है, जिसे पंचांग भद्रा कहते हैं। ये पद्धतियाँ साथ बनाई ही नहीं गईं। क्षेत्रीय पंचांग अपने क्षेत्र की पद्धति लागू करते हैं, और शास्त्रीय ग्रंथ विचारों को क्रम देकर एक-दूसरे के सामने तौलते हैं। हम हर पद्धति को उसकी अपनी शर्तों पर दिखाते हैं।
"हानि" और "पीड़ा" जैसे नाम किसी काल का पारंपरिक स्वरूप बताते हैं। वे यह नहीं कहते कि उसमें कार्य करने से कुछ घटित होगा।
आज़माएँ
चौघड़िया पृष्ठ आपके नगर के लिए आज के सोलह भाग, अभी चल रहे भाग के साथ, दिखाता है। राहुकाल पृष्ठ दक्षिण भारतीय पंचांगों के काल दिखाता है, और मुहूर्त टूल दिखाता है कि शास्त्रीय नियम कैसे जुड़ते हैं।
† चिह्नित तिथियाँ या पाठ विद्वानों में विवादित हैं, या हमारा संकाय उनकी पुष्टि कर रहा है।
विषयchoghadiyamuhurtahoragujaratday-divisions
उद्धरण कैसे दें
स्कूल ऑफ़ वैदिक साइंसेज़, FORE. “चौघड़िया: आठ भागों में दिन.” Shunya, 27 सितंबर 2026. https://fsvs.co.in/hi/shunya/choghadiya-the-day-in-eight-parts
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