कर्मभाव
Karma bhāva
बोलचाल की हिन्दी: कर्म भाव (दशम भाव)
दशम भाव: कर्म, व्यवसाय, प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन।
परिभाषा
दशम भाव ‘कर्म’ कहलाता है और इसे राज्य या आस्पद (पद) भाव भी कहते हैं। ग्रंथ इसे व्यवसाय, अधिकार, सम्मान, सार्वजनिक आचरण और कर्तव्यों की पूर्ति से जोड़ते हैं। यह केंद्र और उपचय भाव है; विभिन्न संदर्भों में सूर्य, बुध, गुरु और शनि इसके कारक कहे गए हैं।
