प्राणायाम
Prāṇāyāma
श्वास का नियमन: पतंजलि के योग का चौथा अंग।
परिभाषा
प्राणायाम (‘प्राण का विस्तार या नियमन’) पतंजलि के योग का चौथा अंग है, जिसे योग सूत्र 2.49 में आसन सिद्ध होने के बाद श्वास और प्रश्वास की गति के नियमन के रूप में परिभाषित किया गया है। हठयोग प्रदीपिका आठ कुंभकों (श्वास-धारण) का वर्णन करती है। यह संदर्भ-सामग्री इन अभ्यासों का वर्णन उसी रूप में करती है जैसे वे ग्रंथों में मिलते हैं।
