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School of Vedic Sciences, FORE
आयुर्वेद

वात

Vāta

गति का दोष, जो आकाश और वायु से बना है।

परिभाषा

आयुर्वेदिक सिद्धांत में वात वह दोष है जो शरीर की समस्त गति, जिसमें श्वास, संचार और मन के आवेग शामिल हैं, के लिए उत्तरदायी है। अष्टांगहृदय (सूत्रस्थान 1) इसके गुण रूक्ष, लघु, शीत, खर, सूक्ष्म और चल बताता है, और यह आकाश तथा वायु महाभूतों से बना है। ग्रंथ इसके पाँच भेद बताते हैं: प्राण, उदान, समान, व्यान और अपान।