पुत्रभाव
Putra bhāva
बोलचाल की हिन्दी: पुत्र भाव (पंचम भाव)
पंचम भाव: संतान, बुद्धि, विद्या और पूर्व पुण्य।
परिभाषा
पंचम भाव ‘पुत्र’ (संतान) कहलाता है और इसे बुद्धि या विद्या भाव भी कहते हैं। ग्रंथ इसे संतान, बुद्धि, विवेक, मंत्र और पूर्व-पुण्य, अर्थात् पूर्व जन्मों से प्राप्त पुण्य, से जोड़ते हैं। यह त्रिकोण और पणफर भाव है; गुरु इसका नैसर्गिक कारक है।
