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School of Vedic Sciences, FORE
आयुर्वेद

ऋतुचर्या

Ṛtucaryā

आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित ऋतु-अनुसार आचरण-विधि।

परिभाषा

ऋतुचर्या (‘ऋतु के अनुसार आचरण’) छह ऋतुओं में से प्रत्येक के लिए वह विधि है जो अष्टांगहृदय सूत्रस्थान 3 और चरक संहिता सूत्रस्थान 6 में वर्णित है। ग्रंथ वर्ष को आदान काल (सूर्य का उत्तरायण, जब बल का ह्रास होता है) और विसर्ग काल (दक्षिणायन, जब बल लौटता है) में बाँटते हैं, और प्रत्येक दोष के संचय को ऋतुओं से जोड़ते हैं। यह संदर्भ-सामग्री इसे ग्रंथगत इतिहास के रूप में प्रस्तुत करती है।