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School of Vedic Sciences, FORE
इतिहास

सारावली

Sārāvalī

कल्याणवर्मा का विस्तृत होरा संग्रह, जो वराहमिहिर के ग्रंथ का विस्तार है।

परिभाषा

सारावली (‘सारों की माला’) कल्याणवर्मा द्वारा रचित होरा संग्रह है, जिसे सामान्यतः नवीं-दसवीं शताब्दी के आसपास का माना जाता है। लगभग चौवन अध्यायों में यह बृहज्जातक की सामग्री का विस्तार करता है, जिसमें दो और तीन ग्रहों की युतियों, योगों और राशियों तथा भावों में ग्रहों के फलों का विस्तृत वर्णन है। मंत्रेश्वर सहित परवर्ती लेखकों ने इससे व्यापक रूप से सामग्री ली है।