बृहज्जातक
Bṛhajjātaka
जातक ज्योतिष पर वराहमिहिर का शास्त्रीय ग्रंथ।
परिभाषा
बृहज्जातक (‘जातक पर बृहत् ग्रंथ’) होरा पर वराहमिहिर का ग्रंथ है, जो लगभग अट्ठाईस अध्यायों में संक्षिप्त पद्यों में रचा गया है। इसमें राशि और ग्रह, बल, आयु, नाभस और चंद्र योग, अष्टकवर्ग और ग्रह-स्थितियों के फल का विवेचन है, और परवर्ती होरा साहित्य में इसे बार-बार उद्धृत किया जाता है। भट्टोत्पल की टीका इसके प्रायः संक्षिप्त पद्यों को समझने का शास्त्रीय साधन है।
