सुखभाव
Sukha bhāva
बोलचाल की हिन्दी: सुख भाव (चतुर्थ भाव)
चतुर्थ भाव: माता, गृह, भूमि, वाहन और आंतरिक सुख।
परिभाषा
चतुर्थ भाव ‘सुख’, ‘बंधु’ या मातृ भाव कहलाता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र इसे माता, निवास, भूमि, वाहन, संबंधियों और मन की शांति से जोड़ता है। माता के लिए चंद्रमा इसका कारक है, और चार केंद्रों में यह अधोबिंदु (नादिर) से संबंधित केंद्र है।
