वराहमिहिर
Varāhamihira
उज्जैन के छठी शताब्दी के खगोलशास्त्री-ज्योतिषी, जिन्होंने तीनों शाखाओं में लिखा।
परिभाषा
वराहमिहिर (छठी शताब्दी ई.) उज्जैन में कार्यरत थे और उन्होंने ज्योतिष की तीनों शाखाओं में लिखा: पंचसिद्धांतिका (खगोल), बृहत्संहिता (संहिता) तथा बृहज्जातक और लघुजातक (होरा), साथ ही विवाह और सैन्य-यात्रा पर भी ग्रंथ। उनके ग्रंथों में प्राचीन भारतीय सामग्री के साथ होरा, केंद्र और आपोक्लिम जैसे यूनानी मूल के पारिभाषिक शब्द भी मिलते हैं। भट्टोत्पल की दसवीं शताब्दी की टीकाएँ उनके ग्रंथों के अध्ययन का मानक साधन बनीं।
इस शब्द का प्रयोग करने वाले लेख
- सिद्धांत
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सिद्धांत-ग्रंथ ग्रहण की गणना कैसे करते हैं, उस गणना में राहु और केतु क्या हैं, और सूतक, जिसका पालन परंपरा-दर-परंपरा बदलता है।
7 मिनट का पाठ · 30 सितंबर 2026
