धर्मभाव
Dharma bhāva (Bhāgya bhāva)
बोलचाल की हिन्दी: धर्म भाव / भाग्य भाव (नवम भाव)
नवम भाव: धर्म, पिता, गुरु, भाग्य और लंबी यात्राएँ।
परिभाषा
नवम भाव ‘धर्म’ या ‘भाग्य’ भाव कहलाता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र इसे धर्म, पिता, गुरु, उच्च शिक्षा, तीर्थयात्रा और भाग्य से जोड़ता है। यह त्रिकोण और आपोक्लिम भाव है; गुरु इसका नैसर्गिक कारक है, और पिता के लिए सूर्य।
