कलत्रभाव
Kalatra bhāva (Jāyā, Yuvati bhāva)
बोलचाल की हिन्दी: कलत्र भाव (सप्तम भाव)
सप्तम भाव: जीवनसाथी, साझेदारी, अनुबंध और सार्वजनिक व्यवहार।
परिभाषा
सप्तम भाव ‘कलत्र’ या ‘जाया’ (जीवनसाथी) और ‘युवती’ भाव कहलाता है। ग्रंथ इसे जीवनसाथी, व्यापारिक साझेदारी, अनुबंध और दूसरों के साथ व्यवहार से जोड़ते हैं; यह लग्न के ठीक सामने स्थित होता है। यह केंद्र भाव है और शुक्र इसका नैसर्गिक कारक है।
