मङ्गलदोष
Maṅgala doṣa (Kuja doṣa)
बोलचाल की हिन्दी: मंगल दोष (मांगलिक)
मंगल का 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होना।
परिभाषा
मंगल दोष (कुज दोष) लग्न से, और अनेक परंपराओं में चंद्रमा से तथा दक्षिण भारतीय रीति में शुक्र से भी, गिने गए 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल की स्थिति है। यह बृहत् पराशर होरा शास्त्र का नहीं, बल्कि परवर्ती मिलान-ग्रंथों का विषय है, और वे ग्रंथ अनेक अपवाद बताते हैं, जैसे मंगल का स्वराशि या उच्च राशि में होना अथवा गुरु की दृष्टि में होना। सामान्य गणना से यह कुंडलियों के बड़े भाग पर लागू होता है, और यही एक कारण है कि इसके अपवादों पर इतना ध्यान दिया जाता है।
