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School of Vedic Sciences, FORE
आयुर्वेद

पित्त

Pitta

रूपांतरण का दोष, जो अग्नि और जल से बना है।

परिभाषा

पित्त रूपांतरण का दोष है, जो आयुर्वेदिक सिद्धांत में पाचन, चयापचय, शरीर की ऊष्मा, दृष्टि और बोध का नियमन करता है। इसके गुण सस्नेह, तीक्ष्ण, उष्ण, लघु, विस्र (आमगंधी), सर और द्रव बताए गए हैं, और यह अग्नि तथा कुछ जल महाभूत से बना है। इसके पाँच भेद पाचक, रंजक, साधक, आलोचक और भ्राजक हैं।