प्रकृति
Prakṛti
प्रकृति: व्यक्ति में तीन दोषों का जन्मजात संतुलन।
परिभाषा
आयुर्वेद में प्रकृति (‘मूल स्वभाव’) वह शारीरिक-मानसिक संरचना है जो गर्भाधान के समय वात, पित्त और कफ की सापेक्ष प्रधानता से निश्चित होती है; चरक संहिता (विमानस्थान 8) एक-दोष से लेकर संतुलित (सम) तक सात प्रकार बताती है। ग्रंथ प्रत्येक प्रकार के विशिष्ट शारीरिक और मानसिक लक्षणों का वर्णन करते हैं। सांख्य दर्शन में प्रकृति मूल जड़ तत्त्व है, जो पुरुष का प्रतिपक्ष है। विद्यालय इस वर्गीकरण को ग्रंथगत अध्ययन के विषय के रूप में प्रस्तुत करता है।
