सहजभाव
Sahaja bhāva
बोलचाल की हिन्दी: सहज भाव (तृतीय भाव)
तृतीय भाव: भाई-बहन, साहस, पराक्रम और छोटी यात्राएँ।
परिभाषा
तृतीय भाव ‘सहज’ (साथ जन्मे, अर्थात् भाई-बहन) या भ्रातृ भाव कहलाता है, और इसे पराक्रम भाव भी कहते हैं। ग्रंथ इसे छोटे भाई-बहन, साहस, उद्यम, भुजाओं और संप्रेषण से जोड़ते हैं। मंगल इसका नैसर्गिक कारक है; यह उपचय और आपोक्लिम दोनों वर्गों में आता है।
