आयुर्भाव
Āyur bhāva (Randhra, Mṛtyu bhāva)
बोलचाल की हिन्दी: आयु भाव (अष्टम भाव)
अष्टम भाव: आयु, गुप्त विषय, उत्तराधिकार और आकस्मिक परिवर्तन।
परिभाषा
अष्टम भाव ‘आयु’, ‘रंध्र’ (छिद्र, दुर्बल स्थल) और मृत्यु भाव कहलाता है। ग्रंथ इसे आयु, बाधाओं, उत्तराधिकार, गूढ़ विद्याओं और अप्रत्याशित घटनाओं से जोड़ते हैं। यह दुःस्थान और पणफर भाव है; शनि इसका नैसर्गिक कारक है।
