ग्रंथ-संग्रह · होरा
Bṛhajjātaka
बृहज्जातक
- रचयिता
- वराहमिहिर
- काल
- छठी शती ईस्वी
- परंपरा
- होरा
सार
जन्म-कुंडली पर वराहमिहिर का संक्षिप्त किंतु कठिन ग्रंथ, जो पूर्ववर्ती यवन (यूनानी)-प्रभावित और भारतीय होरा को सघन श्लोकों में समेटता है। इसमें राशियों, ग्रहों और उनके बल की परिभाषा है, और योग, आयु तथा ग्रह-स्थितियों के फल की चर्चा है। भट्टोत्पल (दसवीं शती) की टीका इसकी मानक सहचर बन गई।
संरचना
पद्य में लगभग 28 अध्याय (संख्या संस्करण के अनुसार भिन्न); भट्टोत्पल की टीका प्रायः साथ में छपती है।
कहाँ पढ़ें
भट्टोत्पल की टीका सहित संस्कृत पाठ कई भारतीय संस्करणों में उपलब्ध है; अंग्रेज़ी अनुवादों में वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री (V. Subrahmanya Sastri) और बी. सूर्यनारायण राव (B. Suryanarain Rao) के अनुवाद हैं।
